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37वां भारतीय भूगोलवेताओं का सम्मेलन आज से

5 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्रविश्वविद्यालयके भूगोल विभाग की ओर से भारतीय भूगोलवेताओं का सम्मेलन तीन दिवसीय अंतर राष्ट्रीय संगोष्ठी आज से शुरू होगी। संगोष्ठी में भू-संसाधन नीतियां, कृषि और बढ़ते नगरीय औद्योगिक परिवेश विषय पर आयोजित की जा रही है। विश्वविद्यालय का भूगोल विभाग इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. एमएस जागलान ने बताया कि भूगोलवेताओं के अंतर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर जामिया मीलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रो. एमएच कुरैशी अध्यक्षीय भाषण देंगे। जेएनयू के प्रो. अमिताभ कुंडू मुख्य वक्ता होंगे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति हरदीप कुमार करेंगे। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एमएस जागलान एवं सचिव प्रो. एसपी कौशिक ने बताया कि 13 फरवरी को प्रो. केडी शर्मा समापन भाषण देंगे। विषयों भूमि अधिग्रहण नीति, नगरीय, औद्योगिक विकास के कारण आसपास के क्षेत्रों में होने वाले सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव पर मंथन होगा।

उदारीकरण नीति का पड़ रहा प्रभाव

प्रो.एमएस जागलान ने कहा कि उदारीकरण की नीति के बाद भारत में शहरों और आसपास भू-दृश्यों पर प्रभाव पड़ा है। इससे नगरीय और ग्रामीण भू-उपयोग में बहुत विरोधाभास पैदा हुआ है। इससे उपनगरीय और साथ लगते ग्रामीण क्षेत्र में किसानों और मजदूरों की आर्थिक सामाजिक स्थिति पर भी विपरीत असर पड़ा है। औद्योगिक बस्तियों में रहने वाले मजदूरों का आवासीय पर्यावरण भी इससे प्रभावित हुआ है। विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास से भी ग्रामीण जीवन पद्धति, आजीविका संस्कृति पर प्रभाव पड़ा है। कई स्थानों पर इस प्रकार के भूमि अधिग्रहण से ग्रामीणों में असंतोष भी पैदा हुआ है। इस प्रक्रिया में नगरीय जनजीवन और सुविधाओं पर भी असर हुआ है। तीन दिन तक चलने वाला यह भू-वैज्ञानिकों का सम्मेलन इन सभी विषयों पर चर्चा करेगा। सम्मेलन में 350 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।

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