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लोकगीत में सांस्कृतिक मूल्यों को शामिल करना जरूरी : शुचिस्मिता

5 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्रविश्वविद्यालयके संगीत विभाग की अध्यक्षा प्रो. शुचिस्मिता ने कहा कि लोकगीत और संगीत में सांस्कृतिक मूल्यों को शामिल करना जरूरी है। जब कलाकार अपने गीतों में सांस्कृतिक विरासत के झरोखों का गुणगान करेंगे तो निश्चित ही लोग कलाकारों के साथ जुड़ेंगे और इस दौरान कलाकार सरकार के मन की बात लोगों तक पहुंचा सकते हैं। वे बुधवार को मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर मेें सूचना, जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से हिसार मंडल के भजन पार्टी सदस्यों खंड प्रचार कार्यकर्ताओं की कार्यशाला में बोल रही थी। सुबह के सत्र में प्रो. शुचिस्मिता ने लोक कलाकारों को संगीत में दृश्यात्मकता की अवधारणा, सुरीला गीत, सहज स्वभाव और नए साहित्य का संकलन करने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। लोक संगीत किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत की बारीकियों से अवगत करवाया। इस अवसर पर सुनील कुमार, धर्मेंद्र सिंह, रीना गौरी और धर्मपाल मौजूद थे।

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