महात्मा गांधी पूंजीवाद को जड़ से उखाड़ना चाहते थे : शर्मा
राष्ट्रपितामहात्मागांधी के अस्थि विसर्जन दिवस पर शुक्रवार को ब्रह्मसरोवर पर गांधी स्मारक निधि, पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. रामप्रकाश ने की।
गांधी स्मारक निधि, पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष महेश दत्त शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश की स्वतंत्रता के द्वारा पूरी मानवता के शोषण, विषमता और गुलामी से मुक्ति के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी पूंजीवाद को जड़ से उखाड़ना चाहते थे और सारे देश को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संरचना के आधार पर स्थापित करना चाहते थे। देश की तीन चौथाई आबादी गांवों में रहती है। इसलिए गांवों को अपनी सारी समस्याएं सुलझाने का अधिकार हो और देश के भाग्य का निर्णय किसान और मजदूर करें। लेकिन महात्मा गांधी की नीतियों की अवहेलना करने और विभिन्न सरकारों द्वारा पूंजीवादी प्रणाली अपनाने के कारण देश में महंगाई बढ़ी। इससे देश की 42 प्रतिशत के लगभग आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने को मजबूर है। महेश शर्मा ने कहा कि औद्योगीकरण और पश्चिमी विकास का परिणाम वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण है। जिसके कारण दुनिया के 62 खरबपतियों के पास इतनी दौलत है, जितनी बाकी दुनिया के आम आदमियों के पास है। शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश को स्वदेशी और खादी की बुनियाद पर स्वतंत्रता दिलाई और गुलामी के दिनों में भी 20 लाख लोगों को रोजगार देने का प्रबंध किया। इसी उद्देश्य से उन्होंने चरखा संघ की स्थापना की, जिसके प्रथम सचिव जवाहरलाल नेहरु थे।
खादीका काम कारपोरेट को सौंपा : महेशशर्मा ने कहा कि दुख की बात है कि केंद्र सरकार ने खादी का काम भी कारपोरेट सेक्टर को सौंप दिया है। कोई भी संस्था, व्यक्ति या कंपनी सरकारी खादी लेबल लगाकर खादी बेच सकता है। उन्होंने कहा कि खादी संस्थाएं इसके लिए सहमत नहीं हैं। इस अवसर पर भारतीय महिला कल्याण समिति की अध्यक्षा निर्मल दत्त, डॉ. विकास सक्सेना, देवराज त्यागी और एमपी डोगरा मौजूद थे।