स्वस्थ रहने के लिए बदलें जीवन शैली : डॉ. देवव्रत
हिमाचलकेराज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने कहा कि आधुनिक दौर के साथ मानव के खानपान में बदलाव आया है। इस बदलाव के कारण मनुष्य कृत्रिम जिंदगी जीने पर मजबूर हो रहा है। जिसके कारण प्रत्येक व्यक्ति बीमारियों से ग्रस्त हो रहा है। इससे बचने का एक ही तरीका है कि हम फिर से प्रकृति की गोद में जाएं और जीवन जीने की शैली को बदलें। राज्यपाल शुक्रवार को जाट धर्मशाला में जिला आयुर्वेद विभाग की ओर से लगाए गए निशुल्क आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। राज्यपाल ने आयुर्वेद विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी, योग, पंचकर्म, नाड़ी परीक्षा, प्रयोगशाला, शिरोधारा और रोगियों की काउंसलिंग पर लगाए गए कक्षों का अवलोकन किया। राज्यपाल ने बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में प्रदेश के हर जिले में मानव को स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से लगाए गए निशुल्क शिविर सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में बीमार को पापी की संज्ञा दी गई है और पहला सुख निरोगी काया को कहा गया है। सभी के सामने मनुष्य का स्वास्थ्य चिंता का विषय है। आयुर्वेद ही सबसे पुराना, सरल और सुगम साधन है, जिससे बीमारियों पर अंकुश लगाकर शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। उन्होंने गुरुकुल कुरुक्षेत्र में 2001 में स्थापित किए गए पंचकर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पद्धति का फायदा लेने के लिए आठ देशों के लोग गुरुकुल में पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि खेत-खलिहानों में परंपरागत तरीके से खेती, गो पालन करने और अपनी जीवन शैली को बदलने की जरूरत है। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. सुदेश जाटियान ने बताया कि आयुष विभाग के महानिदेशक के निर्देशानुसार बसंत पंचमी के अवसर पर शिविर लगाया गया है। शिविर में 1121लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें दवा दी गई। इस मौके पर डॉ. उषा दत्त, डॉ. कृष्ण जाटियान, डॉ. राजा सिंगला, डॉ. एसएस शर्मा, डॉ. चारु, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. जागीर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सहरावत, डॉ. संतोष दहिया, डॉ. हवा सिंह, राममेहर शास्त्री और बूटा सिंह मौजूद थे।