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आज उतार सकते हैं अपने सभी पितरों का ऋण

7 वर्ष पहले
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श्राद्धपक्षमें पितरों के ऋण उतारने के लिए अमावस्या का काफी महत्व माना गया है। अमावस्या को पितृ विसर्जन दिन भी माना जाता है। इस दिन भूले बिसरे पितरों के निमित्त श्राद्ध कराया जाता है।

यानी जिन पूर्वजों के स्र्ववासी होने संबंधित तिथि का ज्ञान ना हो, उनका अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

अमावस्या तक ही श्राद्ध पक्ष माना जाता है। हालांकि इस बार अमावस्या 24 सितम्बर को अमावस्या पड़ रही है। लेकिन ज्योतिषियों की माने तो सर्व पितृ अमावस्या 23 सितंबर को होगी। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक रामराज कौशिक के अनुसार शास्त्रों में मनुष्य के तीन ऋण बताए गए हैं। देव ऋण, गुरु ऋण पितृ ऋण। इनमें से पितृ ऋण को श्राद्ध पक्ष में उतारना अनिवार्य माना गया है। जिन माता-पिता या पूर्वजों ने हमारी आयु, आरोग्यता तथा सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिए प्रयास करे हों, उनके ऋण से मुक्त होने पर जन्म लेना निरर्थक होता है। श्राद्ध पक्ष में अमावस्या का बड़ा महत्व है। आश्विन मास की अमावस्या पितरों की शांति का सबसे अच्छा मुहूर्त है। जिन लोगों ने अपने पूर्वजों का तीन वर्ष तक श्राद्ध किया हो, उनके पितर पितृ योनि से वापस प्रेत योनि में जाते हैं। जिनके पितृ प्रेत योनी में भटक रहे है उनकी पूर्ण मुक्ति और पितृ योनी में स्थान दिलवाने के लिए इस दिन का बड़ा महत्व है।

अमावस्यापर स्नान का महत्व :कुरुक्षेत्र यज्ञ मंदिर ट्रस्ट के सचिव वैद्य पंडित प्रमोद कौशिक के मुताबिक 24 सितंबर की अमावस्या है। इस दिन सभी देवताओं का कुरुक्षेत्र के तीर्थों में वास होता है। कुरुक्षेत्र के तीर्थों में स्नान दान करने का विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने बताया कि जिनकी कुंडली में शनि ग्रह के कारण चंद्रमा कमजोर हो रहा है या साढ़ेसती चल रही हो और वह मानसिक विकारों से दिन-प्रतिदिन ग्रस्त होते जा रहे हों, वे इस दिन अमावस्या पर दूध, चावल, खीर, चांदी, फल, मिष्ठान और वस्त्र इत्यादि अपने पितरों के निमित्त पिंडदान करवाकर इतना पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

श्राद्ध से मिलती है पितृशाप से मुक्ति

शास्त्रोंमें पितृ शाप दोष का वर्णन आता है। पराशर होराशास्त्र,जातक पारिजात,प्रश्न मार्ग,जातक र|,आदि ग्रंथों में पितर दोष एवम उसके होने वाले कुप्रभाव तथा उनके शांति के उपाय भी दिए गए हैं। ज्योतिष में लग्न,द्वित्य,पंचम,षष्ठ,अष्टम नव