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हिंदी है व्यवहार की भाषा : डॉ. कृष्ण चंद रल्हाण

7 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र। यूनिवर्सिटी के फैकल्टी लांज में रविवार को केयू हिंदी विभाग और शोध चेतना अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी कल, आज और कल विषय पर अंतर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें मुख्यातिथि केयू रजिस्ट्रार डॉ. कृष्ण चंद रल्हाण, मुख्य वक्ता केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. कमल किशोर गोयंका और अध्यक्षता हरियाणा साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. श्याम सखा श्याम ने की।
डॉ. कृष्ण चंद रल्हाण ने कहा कि हिंदी आज पूरे विश्व में अपनी पहचान बना रही है। हिंदी भाषा शक्तिशाली एवं प्रभावशाली है। इसके प्रभाव के कारण ही इसे जन-जन की भाषा का दर्जा मिला है। हिंदी संपूर्ण विश्व में सिर्फ समझी जाती है बल्कि बोली भी जाती है। उन्होंने कहा कि केयू हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए गंभीर है।

डॉ. रल्हाण ने कहा कि भाषा व्यवहार का विषय है। इसे जितना व्यवहार में प्रयोग करेंगे यह उतनी ही समृद्ध होगी। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता कमल किशोर गोयंका ने बताया कि वर्तमान में विदेशों में हिंदी को बहुत बड़े पैमाने पर विदेशी सीख रहे हैं। केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रयासों से विदेशी हिंदी को सीखने समझने के लिए और भारत की संस्कृति को समझने के लिए भारत आते हैं। सारस्वत अतिथि अनिल जोशी ने कहा कि संस्कृत और हिंदी भाषा ही ऐसी भाषा हैं जो जैसी बोली जाती है वैसी ही लिखी जाती हैं।
सारस्वत वक्ता डॉ. अंजना संधीर ने कहा कि विदेशी छात्रों को हिंदी गीतों के माध्यम से सरल तरीके से हिंदी पढ़ाई जाती है। अधिकतर छात्र भारतीय हिंदी फिल्मों एवं गीतों को देखने सुनने के लिए हिंदी सीख रहे हैं। डॉ. श्याम सखा श्याम ने बताया कि हिंदी भाषा हमारी मां है और मां के विषय में लिखना हर बेटे का परम कर्तव्य है। हिंदी के प्रचार-प्रसार में टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली हिंदी फिल्मों, गीतों नाटकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
पूरे विश्व की आंखें भारतीय बाजार पर लगी हुई हैं और वे भारत में व्यवसाय करने के लिए हिंदी सीख रहे हैं। इस दौरान उद्योगपति एवं लेखक जयभगवान सिंगला की पांच पुस्तकों, डॉ. अंजना द्वारा अनुवादित पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजराती में लिखित कविता पुस्तक सहित संस्कार चेतना अंतर राष्ट्रीय शोध पत्रिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर डॉ. ब्रहमानंद, डॉ. लालचंद गुप्त मंगल, डॉ. सरिता वाशिष्ठ और ऋषि शर्मा को हिंदी गौरव सम्मान और महेश चंद गुप्त को राजभाषा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।
हिंदी गीतों से सीखते हैं हिंदी। केयू में "हिंदी कल, आज और कल' विषय पर अंतर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित।
(कुरुक्षेत्र| केयू के फै कल्टी लॉज में संस्कार चेतना पुस्तक का विमोचन करते रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णचंद रल्हाण अन्य। )