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177 दिन नहीं चला टैंकर, डिपो को 8.66 लाख का नुकसान

7 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र. हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के डिपो प्रधान अरुण आत्रेय का कहना है कि यदि कार्यशाला में 177 दिन तक टैंकर खड़ा रहा और कोई सप्लाई नहीं दी तो यह अधिकारियों की लापरवाही है। जब महीने में 20 दिन तेल की सप्लाई होती है तो फिर टैंकर को छह महीने तक कार्यशाला में रखना बिल्कुल गलत है। उन्होंने जीएम से अपील की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और संबंधित अधिकारी के खिलाफ एक्शन लिया जाना चाहिए।

कुरुक्षेत्र डिपो में 10 जून 2013 को पुराने टैंकर को मार्ग से उतार लिया गया था। इसकी जगह दूसरा टैंकर संख्या एचआर 66-7824 को 23 जुलाई 2013 को डिपो में लाया गया। जबकि उससे पहली सप्लाई 16 जनवरी 2014 को लाई गई। ऐसे में 177 दिन तक टैंकर कार्यशाला में ही खड़ा रहा। जबकि कुरुक्षेत्र डिपो की तेल सप्लाई पानीपत डिपो के टैंकर ने की, जिससे करीब पौने नौ लाख रुपए का नुकसान कुरुक्षेत्र डिपो को हुआ।

तेल सप्लाई में नहीं मिलती किराया राशि

रोडवेज जीएम रोहताश सिंह का कहना है कि डिपो में तेल सप्लाई के लिए तेल कंपनी से कोई किराया राशि नहीं आती। सिर्फ डीजल का पैसा ही जमा कराया जाता है। ऐसे में पानीपत या फिर अन्य किसी डिपो के टैंकर से सप्लाई होने से डिपो को कोई नुकसान नहीं हुआ। यह आरोप आधारहीन हैं।

महीने में 20 सप्लाई

टैंकर की जरूरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महीने में कम से कम 20 दिन तेल की सप्लाई होती है। कभी कभार तो यह सप्लाई 23 दिन तक भी होती है। कुरुक्षेत्र और पिहोवा डिपो की सप्लाई का आंकड़ा देखें तो मई माह में 23 दिन, जून और जुलाई महीने में 21-21 सप्लाई हुई।

इस तरह होती है तेल की सप्लाई

रोडवेज के नियमानुसार तेल कंपनी को पहले ही एक साथ पेमेंट कर दी जाती है। इसमें से सप्लाई होते ही तेल का पैसा काट लिया जाता है और टैंकर का किराया वापस लौटा दिया जाता है। किराया राशि की स्लिप रोडवेज कर्मी को सौंप दी जाती है। ऐसे में कुल राशि में से टैंकर किराये का पैसा बाद में काट लिया जाता है। यदि कोई दूसरे डिपो का टैंकर इसकी सप्लाई लाता है तो किराया राशि संबंधित टैंकर को मिलती है।