(ज्योतिसर| खादकिल्लत को लेकर रोष जताते किसान।)
कुरुक्षेत्र-ज्योतिसर। सरकार प्रशासन दावे कर रहा है कि खाद की किल्लत नहीं है। लेकिन जिले में सहकारी समितियों के गोदाम खाली पड़े हैं। जिले में 70 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत है। लेकिन अभी तक इसका आधा भी नहीं मिला। जाहिर है कि खामियां किसान भुगत रहे हैं। सोसाइटी में स्टॉक आने के चलते बाजार से किसानों को 30 रुपए प्रति कट्टा महंगा खाद लाइनों में लग कर खरीदना पड़ रहा है। उस पर भी उन्हीं को खाद मिलता है, जो खाद संग दवा लेने को राजी होते हैं। कई दुकानदार रसूखदार ग्राहकों को दुकानों की बजाए बाहर ही बाहर खाद मुहैया करा रहे हैं। जिले में हर सीजन में कम से कम 70 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत होती है। लेकिन इस बार अभी तक इसका आधा भी खाद नहीं मिला।
कृषि अधिकारी भी मान रहे हैं कि अभी तक 35 हजार एमटी खाद ही मुहैया हुआ है। जिले में करीब 70 सहकारी समितियां हैं, जिनसे हजारों किसान जुड़े हुए हैं। ये समितियां ही किसानों को खाद देती हैं। हर सीजन इन सोसाइटी की मार्फत सवा दो लाख कट्टा खाद बंटता है। लेकिन अबके बार किसी सोसाइटी में भूले से स्टॉक आता भी है तो वह पूरा नहीं हो पाता। सहकारी समिति ज्योतिसर में कार्यरत जगतार सिंह के मुताबिक इस सोसाइटी से आसपास के नौ गांव जुड़े हैं, जिन्हें सोसाइटी से पांच हजार कट्टा बांटा जाता है। लेकिन अबके 1450 कट्टे ही उपलब्ध हो पाए।
ज्योतिसर के किसान मनोज, ईश्वर चंद, मुंडाखेड़ा के कर्मवीर के मुताबिक सोसाइटी में खाद ना होने के चलते दुकानों से खाद लेना पड़ रहा है। यहां लाइनों में लग कर जहां 30 रुपए प्रति कट्टा महंगा लेते हैं। साथ में कीटनाशक दवा भी लेनी पड़ रही है। किसान राजपाल, देसराज, कृष्ण कुमार, उमेश आदि ने कहा प्रदेश में खाद की कहीं कमी नहीं है। लेकिन मुनाफे के चक्कर में जानबूझ कर किल्लत पैदा की गई है।
जिले में किसानों की खाद की जरूरत ज्यादातर प्राइवेट खाद विक्रेता पूरी करते हैं। सहकारी समितियों की मार्फत तो महज 30-35प्रतिशत खाद ही मिलता है। जबकि 70 प्रतिशत खाद प्राइवेट विक्रेता पूरी करते हैं। हालांकि यदि जिले की 70 सहकारी समितियों, जिनमें 35 पैक्स शामिल हैं, पर पर्याप्त मात्रा में खाद दिया जाए तो किसानों की अधिकांश जरूरत पूरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में प्राइवेट विक्रेता अपनी मनमानी नहीं कर सकेंगे। किसानों पर जबरन साथ में दवा नहीं बेच सकेंगे।
कृषि उपनिदेशक डॉ.सुरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक खाद कमी का सामना किसान कर रहे हैं। पीछे ही सप्लाई कम आई है। हैफेड का रैक अभी लगना है। हालांकि जिले में अनियमितता की कहीं शिकायत नहीं मिली। प्रशासन दुकानदारों के गोदाम रूटीन में चेक कर रहा है। सप्लाई बिक्री का पूरा रिकार्ड देखा जा रहा है।
वहीं कई खाद विक्रेता अपने बड़े ग्राहकों को दुकान की बजाए बाहर ही बाहर खाद उठवा रहे हैं। ऐसे ही एक खाद विक्रेता ने सप्लाई अपनी दुकान की बजाए सब्जी मंडी में उतरवाई। वहीं से कुछ किसानों को थोक में खाद उपलब्ध करा दिया। दुकानदार भी अपना मुनाफा देखकर खाद बेच रहे हैं। किसानों की मानें तो सहकारी समितियों के पास तो स्टॉक नहीं रहा। जबकि दुकानों पर खाद पूरा पहुंचाया जा रहा है। सरकार को सहकारी समितियों को पर्याप्त खाद मुहैया कराना चाहिए, जिससे कालाबाजारी पर रोक लग सके।
केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंधक सुनील पातड़ कहते हैं कि खाद की कमी नहीं है। हालांकि सोसाइटी में जरूर यह दिक्कत रही है। इसके पीछे भी कई किसान जिम्मेदार हैं। बड़े किसान एक साथ काफी खाद खरीद कर ले गए हैं। उन्हें संभवत:यही डर है कि कहीं आगे भी किल्लत का सामना करना पड़े। ऐसे में कई किसान अगली बार का खाद भी उठा ले गए हैं। इसके चलते भी खाद की किल्लत नजर रही है। दूसरे सोसाइटी के पास हैफेड से सप्लाई आती है। जल्द ही हैफेड का एक रैक लगेगा, जिससे कमी खत्म हो जाएगी।
प्राइवेट 30 रुपए देते महंगा ।
नहीं आ रही सप्लाई ।
बाहर ही मिल रहा खाद ।
डर में कर रहे स्टॉक ।
दावा कमी नहीं का|जिले की 70 सोसाइटी पड़ी हैं खाली ।
30 प्रतिशत ही मिलता सरकारी ।