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आयोग ने पूछा - क्यों नहीं केडीबी में कोई एससी सदस्य

7 वर्ष पहले
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योजनाओं की समीक्षा

केडीबी से मांगा जवाब

>पदेन सदस्यों के अलावा होते हैं कई गैर सरकारी सदस्य

भास्करन्यूज| कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्रविकासबोर्ड में अनुसूचित एवं जनजाति वर्ग से कोई गैर सरकारी सदस्य होने पर अब एससी एसटी आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने केडीबी राज्यपाल की सदस्य सचिव को पत्र लिख कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसकी पुष्टि खुद अनुसूचित एवं जनजाति आयोग के सदस्य चौ. ईश्वर सिंह ने की।

बताया जाता है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर एसोसिएशन ने इस संबंध में आयोग को शिकायत की है, जिसमें बताया कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नहीं दिया जा रहा। बोर्ड के गठन से लेकर आज तक केडीबी में कोई भी सदस्य अनुसूचित जाति का नहीं लिया गया।

राज्यपाल पदेन अध्यक्ष

केडीबीके संस्थापक अध्यक्ष गुलजारी लाल नंदा को बनाया गया था। नंदा जी के निधन के बाद राज्यपाल इसके अध्यक्ष हैं और मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष बनाए गए। साथ ही थानेसर के पदेन विधायक, डीसी आदि को सदस्य मनोनीत किया। वहीं करीब नौ गैर सरकारी सदस्य सरकार द्वारा चुने जाते हैं। बताया जाता है कि इस समय अजा वर्ग से कोई केडीबी का सदस्य नहीं है।

अभीनहीं मिला पत्र

केडीबीकी सदस्य सचिव नीलम प्रदीप कासनी का कहना है कि अभी इस संबंध में उन्हें आयोग का पत्र नहीं मिला है। यदि ऐसा है तो वे इस संबंध में केडीबी सीईओ से जानकारी लेंगी।

ईश्वर सिंह ने बताया कि अनुसूचित एवं जनजाति आयोग ने सरकार द्वारा दलितों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की प्रत्येक जिले में जाकर समीक्षा करने का निर्णय लिया है। वे स्वयं 24 दिसंबर को जींद में योजनाओं की समीक्षा करेंगे, ताकि पता चल सके कि हरियाणा में दलित वर्ग के लोगों को सरकार द्वारा चलाई जा रही इन योजनाओं का कितना लाभ मिल रहा है।

चौ ईश्वर सिंह ने बताया कि शिकायत पर आयोग ने बोर्ड से पूछा कि बताया जाए कि गठन से लेकर अब तक कितने सदस्य बने। इनमें कितने अजा वर्ग के हैं। क्या अब बोर्ड के सदस्यों में आरक्षण के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। बता दें कि कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परीधि में स्थापित तीर्थों के रखरखाव के लिए सन 1968 में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. गुलजारी लाल नंदा ने केडीबी का गठन कराया था। तत्कालीन सीएम बंसी लाल सरकार ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया था।