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कैसे होगा खेलों का विकास, खिलाड़ी खुद बनी रेफरी

7 वर्ष पहले
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( कुरुक्षेत्र : शुक्रवार को हुई लड़कियों की हैंडबॉल प्रतियोगिता में रेफरी की भूमिका निभाई थी सीनियर खिलाड़ी ने।)
कुरुक्षेत्र। ग्रामीण क्षेत्रसे बेहतरीन खिलाड़ी निकालने के लिए प्रदेश सरकार खेल विभाग चाहे कितने ही दावे कर रही है। लेकिन हकीकत में खेल प्रतियोगिताओं को महज रस्मी तौर पर लिया जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ राजीव गांधी खेल अभियान के तहत द्रोणाचार्य स्टेडियम में शनिवार को संपन्न हुई दो दिवसीय ग्रामीण स्कूल खेलकूद प्रतियोगिता में। जिला स्तरीय अंडर-16 ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता में शनिवार को हैंडबॉल प्रतियोगिता मैच रेफरी के बिना हुआ। रेफरी होने पर सीनियर खिलाड़ी प्रीति कविता ने ही रेफरी की भूमिका निभाई।
इसी तरह शनिवार को अंडर-16 वर्ग की हैंडबॉल प्रतियोगिता में भी रेफरी की भूमिका इन्हीं दोनों सीनियर खिलाड़ियों ने निभाई। पूछे जाने पर बताया कि मौजूदा समय में जिला में एक भी हैंडबाल प्रशिक्षक नहीं है, जिसके चलते वे ही मैच रेफरी की भूमिका निभा रही हैं।
कुछ दिन पहले द्रोणाचार्य स्टेडियम में आयोजित हुई बाक्सिंग प्रतियोगिता के दौरान एक खिलाड़ी गंभीर तौर पर जख्मी हो गया था। इसका कई दिनों तक निजी अस्पताल में उपचार चला था। उस दौरान घायल खिलाड़ी के परिजनों ने मैच के दौरान रेफरी और प्रशिक्षक का मौके पर होना बताया था। आरोप लगाया था कि बिना रेफरी के प्रतियोगिता चल रही थी, जिसका खामियाजा उनके बेटो को भुगतना पड़ा था।

पार्षद सुरेंद्र छिंदा का कहना है कि बिना रेफरी के मैच निपटाने से प्रतियोगिता के प्रति विभाग की उदासीनता साफ नजर रही है। इस तरह बिना प्रशिक्षित रेफरी के प्रतियोगिता महज एक औपचारिकता भर बन जाती है। इसमें खिलाड़ियों या टीम के साथ भेदभाव और खिलाड़ियों के चोटिल होने का भी खतरा बना रहता है। लिहाजा लापरवाही बरतने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
जिलाखेल अधिकारी एलएल त्यागी का कहना है कि जिले में हैंडबाल के एकमात्र प्रशिक्षक हरकेश सहारण थे। जो मई में रिटायर्ड हो चुके हैं। उनके बाद जिला में हैंडबाल का एक भी प्रशिक्षक नहीं है। लिहाजा मजबूरी में प्रतियोगिता में रेफरी की भूमिका सीनियर खिलाड़ियों ने निभाई। उनका कहना है कि प्रतियोगिता में संबंधित खेल का तकनीकी ज्ञान रखने वाले खिलाड़ी को रेफरी बनाया जा सकता है। इसके लिए चाहे उसके पास रेफरी की योग्यता हो या हो।

- मौजूदा समय में जिले में एक भी हैंडबाल प्रशिक्षक नहीं।