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विद्यार्थियों की संख्या भिवानी बोर्ड से होती है तय, जिलास्तर पर नहीं हो सकता समाधान

7 वर्ष पहले
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बात

सीधी

स्कूल में नहीं बैठे टाट पर

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में परीक्षार्थियों के लिए नहीं हैं पर्याप्त बैंच

भास्करन्यूज | कुरुक्षेत्र

हरियाणाविद्यालयशिक्षा बोर्ड, भिवानी की ओर से ली जा रही बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षा विद्यार्थियों से टाट पर बैठाकर ली जा रही हैं। यह कारनामा राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानेसर कर रहा है। जिसके चलते परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिलचस्प बात तो यह है कि जिन विद्यार्थियों को टाट पर बैठाया गया वे प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थी हैं।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब दैनिक भास्कर की टीम ने टाट पर बैठे परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को कैमरे में कैद किया। टीम को देखते ही परीक्षा में ड्यूटी दे रहे शिक्षकों और स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग भले ही प्रदेश के राजकीय स्कूलों में सभी सुविधाएं देने के लाख दावे क्यों करें लेकिन टाट पर बैठकर बोर्ड परीक्षा देने की तस्वीर इन सब दावों की पोल खोल रही है।

कुरुक्षेत्र| राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानेसर में टाट पर बैठकर परीक्षा देते विद्यार्थी।

पर्याप्त बेंच हों उपलब्ध

थानेसरके एसडीएम विनय प्रताप सिंह ने भी माना कि परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थियों को बेंच उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब वे उड़नदस्ते की टीम में शामिल होकर राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानेसर में गए थे तब भी उन्होंने विद्यार्थियों को बेंच उपलब्ध करवाने के लिए शिक्षा अधिकारी को कहा था। जिसपर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सभी मौजूद बेंच उपलब्ध कराने की बात कही थी। सिंह ने कहा कि इस बारे में पूरी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी ही दे पाएंगी।

{सवाल- राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को टाट पर बैठकर परीक्षा क्यों देनी पड़ रही है?

{जवाब- जितने बेंच थे सभी उपलब्ध कराए गए हैं। परीक्षा केंद्र में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण यह समस्या रही है।

{सवाल- सेंटर बनाते समय बेंचों की संख्या का ध्यान क्यों नहीं रखा जाता?

{जवाब- सेंटर में विद्यार्थियों की संख्या भिवानी बोर्ड से ही तय होती है। इसलिए जिलास्तर पर इस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।

जिला शिक्षा अधिक