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भागवत कथा में सुनाया गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण प्रसंग

7 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र |सेक्टर पांच कम्युनिटी सेंटर में आयोजित भागवत कथा में कथावाचक पंडित पवन भारद्वाज ने बालकृष्ण लीलाएं, गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण और कंस वध का प्रसंग सुनाया।

भारद्वाज ने कहा कि भागवत कथा जीवों को उद्धार करती है। जिस प्रकार हम अपने बच्चों एवं परिजनों को विवाह इत्यादि समारोह में लेकर जाते हैं। उसी प्रकार भागवत एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी उन्हें लाना चाहिए। जिससे उनके अंदर भारतीय संस्कार पनप सकें। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनि में भ्रमण करने के बाद जीव को मनुष्य शरीर मिलता है और मानव शरीर प्राप्त होने के बाद ही भगवत प्राप्ति की सिद्धी होती है। जो कि यह शरीर नाशवान होने पर भी अत्यंत दुर्लभ है। जीव मात्र की सच्ची माता, सच्चा पिता और सच्चा हितैषी केवल भगवान ही है, जीव उस परमपिता का अंश है, विपत्तिकाल में केवल वही बचा सकता है। भगवान को सदा अपने अंश, जीव की बड़ी चिंता रहती है। भगवान जीव को अपनी गोद में लेने के लिए सदा तत्पर रहते हैं। भागवत आरती में आचार्य नरेश कौशिक, प्रदीप भारद्वाज, रघु शर्मा, रमेश पौलत्सय, यशपाल शर्मा, वेदप्रकाश शर्मा, श्यामलाल अरोड़ा, दर्शनपाल शर्मा, जेपी आश्री, अशोक शर्मा, देवीदयाल शर्मा, सुरेश भारद्वाज सहित महिलाओं ने भाग लिया।

सेक्टर पांच के कम्युनिटी सेंटर में चल रही भागवत कथा में आरती करते श्रद्धालु।