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दोबारा मेडिकल हुआ तो तीन की बढ़ गई चोटें
रणजीतउसकेपरिवार के तीन लोग झगड़े में घायल हो गए। तीनों को एलएनजेपी अस्पताल लाया गया। जहां एक चिकित्सक ने एमएलआर तो बनाई, लेकिन उन्हें लगी चोटों की जहां संख्या कम बताई, वहीं गंभीर चोटों को साधारण बताया। जबकि तीनों बुरी तरह जख्मी हुए थे। बाद में कोर्ट ने जब रि-मेडिकल कराया तो चोटों की संख्या भी बढ़ गई। साथ ही गंभीर चोट भी नजर गई। ऐसे ही आरोप लगाए हैं, बारवा के रणजीत सिंह ने। यह लापरवाही सामने आने पर डीसी सीजी रजनीकांथन ने सिविल सर्जन को जांच के आदेश दिए। सिविल सर्जन ने एसएमओ डॉ.सुरेंद्र राणा की अगुवाई में टीम को जांच सौंपी है।
सांठगांठकर एमएलआर में दिखाई आधी चोटें : बारवावासी रणजीत सिंह ने बताया कि सात अक्टूबर की रात कुछ लोगों ने रंजिश के चलते उनके घर में घुसकर तेजधार हथियारों से हमला किया था, जिसमें वह, उसका बेटा इकबाल और पुत्रवधू कुलविंद्र कौर घायल हो गए थे। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए। आरोप लगाया कि वहां डयूटी पर तैनात डाक्टर ने एमएलआर काटने में लापरवाही बरती। उन्हें लगी चोट कम दिखाई। जबकि उन्हें कई गंभीर चोटें लगी थी। इस पर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
रि-मेडिकलके बाद बदली एमएलआर : कोर्टके आदेश पर 11 अक्टूबर को एलएनजेपी के तीन चिकित्सकों डॉ.एनके परुथी, डॉ. कृष्ण लाल डॉ. मनजीत के पैनल ने उन तीनों का दोबारा मेडिकल किया, जिसमें उनकी गंभीर चोट भी सामने आई। वहीं पहले डाक्टर ने जहां एक दो चोटें दिखाई थी, उनकी संख्या भी बढ़कर पांच से छह हो गई। केवल उसकी, बल्कि बेटे पुत्रवधू को भी कई चोटें मिली। पैनल ने चोटों को ब्लंट दिखाया। कुलविंद्र कौर का कहना है कि उसके माथे पर दूसरे पक्ष के लोगों ने कुल्हाड़ी से वार किया था, जिसमें उसे आठ टांके आए थे। इसके बावजूद उसे ब्लंट चोट लिखा गया। इकबाल ने बताया कि उसकी चोटें भी चिकित्सक ने एमएलआर में दो ही बताई। जबकि पैनल ने पांच चोटें दिखाई।
डीसीको शिकायत-अब बिठाई जांच : पीड़ितपक्ष ने सात नवंबर को डीसी को शिकायत सौंप कर उक्त चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। डीसी ने सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र ग्रेवाल को जांच के निर्देश दिए। जिस पर एसएमओ डॉ. सुरेंद्र राणा और डॉ. लज्जा राम की निगरानी में एक कमेटी गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए। कमेटी ने जांच भी शुरू कर दी। डॉ.सुरेंद्र राणा का कहना है कि कमेटी अभी जांच कर रही है। जांच के बाद