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मुद्रण क्षेत्र में दुनियाभर में तीसरे स्थान पर है भारत
समाचार पत्रों में आगे है देश
समाचारपत्र, मैगजीन और किताबों के प्रकाशन के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। भारत में इस कार्य के लिए मैन पावर भी उपलब्ध है। भारत में दुनिया के कई अन्य देशों के मुकाबले प्रिंटिंग का काम काफी सस्ता है। इसलिए विदेशी कंपनियां भारत में इस क्षेत्र में निरंतर निवेश कर रही हैं। केयू प्रिंटिंग प्रेस के मैनेजर एमके मौदगिल ने कहा कि मुद्रण का क्षेत्र संभावनाओं से भरा है। इस क्षेत्र में आने वाले विद्यार्थी प्रिंटिंग, ग्राफिक्स, पैकेजिंग, पब्लिशिंग और डिजिटल प्रिंटिंग सहित कई क्षेत्रों में अपना भविष्य बना सकते हैं। मौके पर कंवरदीप, सचिन वर्मा, अमित जांगड़ा, जितेंद्र रोहिला, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. मधुदीप सिंह और आबिद अली मौजूद थे।
भास्कर न्यूज | कुरुक्षेत्र
हार्परकोलिनसपब्लिशर्स इंडिया के जीएम अमित शर्मा ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने प्रिंटिंग उद्योग को पूरी तरह से बदल दिया है। इसे ऐसे मानव संसाधन की जरूरत है जो तकनीकी रूप से कुशल हो। वे शनिवार को केयू के जनसंचार और मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से प्रिंटिंग एंड पैकेजिंग बिजनेस मैनेजमेंट विषय पर फैकल्टी लांज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उदघाटन पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय मुद्रण उद्योग पूरी दुनिया में तीसरे स्थान पर है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में संभावनाएं निरंतर बढ़ रही हैं।
संस्थान के निदेशक प्रो. एसएस बूरा ने कहा कि प्रिंटिंग के साथ-साथ वर्तमान में ग्राफिक्स और पैकेजिंग के क्षेत्र में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। नई सूचना तकनीक के कारण ई-पब्लिशिंग का बड़े स्तर पर प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन पैकेजिंग एक ऐसा विषय है जिसपर नई तकनीक का कोई प्रभाव नहीं है। मार्केट में इस तरह के सॉफ्टवेयर और तकनीक उपलब्ध हैं, जिसके माध्यम से भारत पैकेजिंग के क्षेत्र में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। गुड़गांव की अंतरराष्ट्रीय कंपनी से आए विशाल शर्मा ने कहा कि डिजिटल तकनीक के कारण मुद्रण की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। वहीं इस क्षेत्र में मानव संसाधन की मांग भी निरंतर बढ़ रही है। पिटनेबावज अमेरिकी कंपनी के बिजनेस मैनेजर नीरज जग्गा ने दुनियाभर में प्रिंटिंग क्षेत्र की इकोनॉमी पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया की निगाहें भारत की ओर हैं।