पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • हनुमान सीता के प्रसंग प्रस्तुत किए

हनुमान-सीता के प्रसंग प्रस्तुत किए

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्रीलक्ष्मीरामलीला ड्रामेटिक क्लब की ओर से विष्णु कॉलोनी में चल रही रामलीला में रविवार रात को अशोक वाटिका के प्रसंग का मंचन किया गया। इसमें रावण-सीता के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। अशोक वाटिका में माता सीता द्वारा हनुमान जी को निशानी स्वरूप मुद्रा देना और राक्षसों द्वारा परेशान किए जाने पर हनुमान जी द्वारा बाग उजाड़ने का दृश्य भी दिखाया गया।

बाग उजाड़ते समय हनुमान जी द्वारा दर्शकों के बीच फेंके गए फल उठाने के लिए दर्शकों में होड़ लगी रही। कार्यक्रम में हनुमान जी की भूमिका निभा रहे हिंदू-सिख एकता के प्रतीक बजरंगी सरदार कुलवंत भट्टी ने बताया कि रामलीला मंच पर अश्लील नृत्य और गाने प्रस्तुत किए जाने के बावजूद दर्शकों ने उन्हें भरपूर स्नेह दिया है। पिछले 10 दिनों से चल रही रामलीला में आए दिन दर्शकों की संख्या बढ़ती जा रही है। मौके पर संरक्षक सुरेंद्र गुप्ता, चेयरमैन राजिंद्र गर्ग, प्रधान सुंदरलाल, उपप्रधान गुलशन रतड़ा, राजेश बंसल, सचिव महेंद्र ठाकुर, सहसचिव राम अवतार मित्तल, रमेश चंद्र सिंगला, ओमप्रकाश धीमान, पवन कुमार, कृष्ण लाल वधवा, प्रबंधक रमेश शर्मा, रमेश चुघ, मूल सिंह, हुकम मौजूृद थे।

लाडवा |श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए आचार्य शैलेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिस प्रकार पृथ्वी तक जुड़े रहने तक ही वृक्ष का जीवन होता है। उसी प्रकार मनुष्य भी तभी अपने जीवन का सुंदर ढंग से निर्वाह कर सकता है, जब वह धर्म-कर्म, अध्यात्म, समाज और परिवार से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन का आधार है।

वे सोमवार को लाडवा की शिवाला रामकुंडी परिसर में दूसरे दिन कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि भागवत में उदाहरण है कि धुंधकारी ने कभी भी बड़ों का आदर नहीं किया और वह हमेशा समाज राष्ट्रप्रेम से दूर रहकर निंदा करने में जीवन यापन करता रहा। इसके कारण उसका जीवन भी बिगड़ गया और अंत भी। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे जीवों पर भी गोविंद की कृपा हो जाती है और उनको भी जब कोई संत भागवत कथा सुना देता है तो ऐसे जीव का कल्याण हो जाता है। भागवत कथा का व्याख्यान करते हुए उन्होंने परीक्षित जन्म, दिग्विजय की कथा भी सुनाई। इसके अलावा शुकदेव द्वारा परीक्षित जैसे सुपात्र को शुक्रताल में कथा सुनाने पर परीक्षित की जिज्ञासा और शुकदेव द्वारा किए गए समाधान की चर्चा की। शैलेंद्र शास्त्री ने बताया कि पितृ पक्ष म