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फसलों के लिए इको फ्रेंडली केमिकल अब तैयार करें वैज्ञानिक : प्रो. तंवर

7 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्रयूनिवर्सिटीके डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. राघवेंद्र तंवर ने कहा कि खेती में प्रयोग किए जाने वाली कीटनाशक दवाओं में प्रयोग होने वाले केमिकल लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। इससे घातक बीमारियां फैल रही हैं। वैज्ञानिकों को चाहिए कि ऐसे केमिकल तैयार करें जिसका तो लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़े और वे इको फ्रेंडली भी हों।

वे शुक्रवार को केयू के केमिस्ट्री विभाग अौर इंडियन केमिकल सोसाइटी कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में आरके सदन में चल रहे केमिस्ट के 51वें अधिवेशन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केयू का केमिस्ट्री विभाग विज्ञान के क्षेत्र में देश के अग्रणी विभागों में से एक है। इस विभाग के शिक्षकों के मार्गदर्शन में देश के लिए बेहतर युवा वैज्ञानिक तैयार हो रहे हैं। प्रो. तंवर ने कहा कि ग्रीन केमिस्ट्री समय की जरूरत है। वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को केमिस्ट्री के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे शोध का प्रयोग मानव कल्याण के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साइंस के क्षेत्र में लड़कियों की संख्या जिस तरह से बढ़ रही है वह देश और समाज के लिए गर्व का विषय है।

ईमानदारीके साथ करें शोध : डीनऑफ साइंस प्रो. श्याम कुमार ने कहा कि जिस तरह से ज्ञान भक्ति की कोई सीमा नहीं होती उसी तरह शोध की भी कोई सीमा नहीं होती। एक अच्छा शोधार्थी और वैज्ञानिक निरंतर शोध कर खुद को अपने शोध की गुणवत्ता को सुधारता रहता है। उन्होंने कहा कि शोध के क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए वैज्ञानिकों को ईमानदारी के साथ शोध करना चाहिए। दुनिया के महान वैज्ञानिक अगर ईमानदारी से अपना काम नहीं करते तो विज्ञान के क्षेत्र में इस तरह का विकास नहीं होता। उन्होंने कहा कि चार दिनों तक चले इस अधिवेशन में केमिस्ट्री के विभिन्न विषयों पर जिस तरह की चर्चा हुई है वह अपने आप में सराहनीय है।

पढ़े गए 71 शोधपत्र

इंडियनकेमिकल सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. आरएन प्रसाद ने कहा कि यह अधिवेशन इसलिए सफल रहा क्योंकि इस अधिवेशन में युवा वैज्ञानिकों ने सबसे अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए। इससे साफ है कि आने वाली पीढ़ी वैज्ञानिक शोध में आगे होगी। सोसाइटी के सचिव प्रो. डीसी मुखर्जी ने कहा कि यह अधिवेशन युवा वैज्ञानिकों के लिए एक बेहतर प्लेटफार्म साबित हुआ है। इस अधिवेशन में 45 विशेष व्याख्यान, 71 शोधप