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मौसम की पहली बारिश ने लुढ़का दिया छह डिग्री तापमान

7 वर्ष पहले
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अगले 48 घंटे होगी बारिश

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शनिवारतड़केअचानक बादलों की गडगडाहट से कुरुक्षेत्र का आसमान गूंजने लगा। कुछ ही देर में झमाझम बारिश शुरू हो गई। सर्दियों के मौसम की पहली बारिश ने तापमान नीचे गिरा दिया। अभी तक ठंड के दो माह बीत चुके थे। बावजूद इसके मौसम में ज्यादा ठंडक नहीं थी। अब बारिश से मौसम का मिजाज भी पलट गया। शनिवार का नजारा कुछ ऐसा ही था। सुबह शुरू हुई बूंदाबांदी रुक-रुक कर शाम तक चलती रही। जैसे जैसे बारिश होती रही, तापमान गिरता गया।

शुरुआती बारिश में तो कुछ देर के लिए ओले भी गिरे, जिसके चलते तापमान छह डिग्री सेल्सियस तक गिरा। वहीं दिनभर सूर्य देव के दर्शन भी नहीं हो सके। मौसम विशेषज्ञों की माने तो रविवार को भी बारिश जारी रहने की संभावना है। यदि बारिश का मिजाज ऐसे ही रहा तो गेंहूं और सब्जियों की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। वहीं ठंड के कारण जन जीवन भी प्रभावित हुआ है। बारिश के साथ-साथ चली ठंडी हवा ने भी लोगों को घर में ही दुबकने पर मजबूर कर दिया।

15 डिग्री तक पहुंचा तापमान

शुक्रवारको जहां अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस था, वहीं शनिवार को यह छह डिग्री लुढ़क कर 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। जबकि न्यूनतम तापमान में 5.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी रिकॉर्ड हुई। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस था, जबकि शनिवार को यह बढ़कर नौ डिग्री तक पहुंचा। सुबह के समय नमी की मात्रा 78 और शाम को 65 प्रतिशत रही। हवा में दबाव सुबह 8.9 और शाम को 10 एमएम रहा। दिनभर 5.6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा चलती रही।

वेस्टर्न डिस्टर्बन्स भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाकों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफ़ान को कहते हैं जो वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, अन्ध महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और बर्फ़ के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान नेपाल पर गिरा देता है।

कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रद्युमन भटनागर के मुताबिक शनिवार को हुई बारिश से गेहूं सब्जियों की फसल पर अधिक नुकसान नहीं होगा। लेकिन यदि बारिश जारी रही तो यह गेहूं की पैदावार को प्रभावित कर सकती है। जिन खेतों में पहली सिंचाई हो चुकी है और उसमें ब