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अब ब्रह्मसरोवर से होकर बहेगा ताजा जल

6 वर्ष पहले
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बार-बार खाली करने से गड़बड़ाया है इको सिस्टम, सीएम ने दिए प्रपोजल बनाने के निर्देश

जल की व्यवस्था : अभी भाखड़ा नहर से मिलता है 15 दिन पानी


कुरुक्षेत्र। देश के भव्य सरोवरों में शुमार ब्रह्मसरोवर में अब ताजा जल बहेगा। सरोवर में निरंतर जल आने की व्यवस्था सरकार करने जा रही है। सीएम मनोहरलाल ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड जिला प्रशासन को इसके लिए प्रपोजल तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह प्रस्ताव थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने दिल्ली में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष रखा। शहर के कई संगठन भी सरोवर स्वच्छ बनाए रखने के लिए निरंतर बहते जल की व्यवस्था करने की मांग काफी समय से कर रहे थे।

बता दें कि ब्रह्मसरोवर में विश्व के कोने-कोने से श्रद्धालु पर्यटक स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। सालभर में पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। जबकि सूर्य ग्रहण, सोमवती अमावस्या और अन्य पर्वों के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की संख्या इससे अलग है। अक्सर श्रद्धालुओं की यह शिकायत रहती है कि सरोवर का जल गंदा है। लोग भी स्नान के बाद आस्था के चलते यहां आटा, चावल अन्य सामग्री डाल कर गंदगी फैलाते हैं।

स्वच्छ रखने को तैयार होगा प्रोजेक्ट : विधायकसुभाष सुधा ने बताया कि कुरुक्षेत्र को विश्व पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए मास्टर प्लान के तहत काम हो रहा है। इसी के तहत ब्रह्मसरोवर में जल के निरंतर प्रवाह की योजना बनाई जा रही है। इससे सरोवर में साफ पानी बना रहेगा। ब्रह्मसरोवर पर पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।

नरवाना ब्रांच से पहुंचता है पानी : ब्रह्म सरोवरमें नरवाना ब्रांच नहर से एक छोटी नहर के जरिए पानी पहुंचाया जाता है। लेकिन इसके लिए महीने में जरूरत के मुताबिक ही पानी मिलता है। बड़े पर्वों के लिए सरोवर का पानी निकाल कर साफ किया जाता है। साथ ही फिटकरी आदि डाली जाती है। पर्यावरणविदों की मानें तो इसके चलते ब्रह्मसरोवर का इको सिस्टम गड़बड़ा चुका है। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी जियोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.रोहताश गुप्ता के मुताबिक बार बार पानी निकाल साफ करने के चलते इसका इको सिस्टम प्रभावित हुआ है। एक तालाब को विकसित होने में बरसों लगते हैं। पानी निकालने से इसमें उगने वाले जलीय पौधे खत्म हो जाते हैं। जबकि यही जलीय पौधे इसका इको सिस्टम बनाते हैं।

घट चुकी है प्रवासियों की संख्या : बार बार पानी निकालने का असर यह हुआ कि यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों की तादाद अब पांच प्रतिशत भी नहीं रही। डॉ.गुप्ता के मुताबिक उन्होंने कई साल यहां प्रवासी पक्षियों को लेकर शोध किया है। दो दशक पहले तक यहां लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी ठंड के दिनों में पहुंचते थे, अब पांच प्रतिशत भी नहीं। इन पक्षियों को निहारने के लिए भारी संख्या में पर्यटक आते थे। लिहाजा अब निरंतर जल की योजना ठीक रहेगी। हालांकि यह सुनिश्चित करना होगा कि इससे जलीय पौधों पर असर ना पड़े।