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चेहल्लुम पर शहीदों को दी मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि

7 वर्ष पहले
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सूफीसंतरामधन रहमत अली अनवारिया ने चिश्तिया दरगाह पीर अनवारे सादिक (कृष्ण दरबार) में शनिवार देर सायं चेहल्लुम के उपलक्ष्य में श्रद्धांजलि के वक्त दुआ की। कार्यक्रम में दरगाह पर संगत द्वारा मोमबत्तियां जलाकर 72 शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने करबला के मैदान में ईमान की रक्षा के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी। श्रद्धांजलि से पूर्व पवित्र कुरान शरीफ की आयतें पढ़ी गई। इसके बाद भंडारा हुआ। संत रामधन ने बताया कि चेहलुम-हजरत इमाम हुसैन का चालीसवां है, जिसमें एक ही परिवार के 72 सदस्य अनुयायी अपने ईमान की रक्षा के लिए करबला के मैदान में शहीद हुए थे, ने तमाम दुख सहने के बावजूद सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए अपनी जान की कुर्बानी दी। उनकी शहादत आज भी कायम है और रहेगी।

चेहल्लुम की दास्तान बताते हुए उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन जोकि इस्लाम के पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे थे, ने हठधर्मी सुलतान यजीद को खुदा मानने से इंकार किया और खुदा की राह में मुहर्रम के दिनों में अपनी 72 परिजनों और साथियों सहित एक ही रात में ईमान की रक्षा के लिए कुर्बानी दी।

कुरुक्षेत्र|पीर की मजार में दुआ करते श्रद्धालु।