कल तक थी चहलपहल अब तट सूना
सरस में 250 से ज्यादा थे स्टाल
इसबार राष्ट्रीय सरस मेले में देशभर से शिल्पकारों और लघु उद्यमियों ने 250 से ज्यादा स्टॉल लगाए थे। सरस मेला कुरुक्षेत्र उत्सव के तहत 24 नवंबर से राष्ट्रीय शिल्प मेले के साथ ही शुरू हुआ था। शिल्प मेला तो दो दिसंबर को गीता जयंती आयोजनों संग संपन्न हो गया था। लेकिन सरस मेले को सात दिसंबर तक चलाया गया। हालांकि बाद में रविवार को देखते हुए सरस मेले की अवधि एक दिन तक बढ़ाई गई। बता दें कि करीब तीन साल पहले भी राष्ट्रीय सरस मेला कुरुक्षेत्र में लगा था। साल में एक मर्तबा ही सरस मेला किसी एक जगह पर लगाया जाता है।
शिल्प सरस में हुआ करोड़ों का कारोबार
अबकीबार बेशक शिल्प मेला कम अवधि का रहा। लेकिन कमाई के लिहाज से शिल्पकारों को मायूसी नहीं हुई। सरस शिल्प मेले में करोड़ों रुपए का कारोबार हुआ। शिल्प मेले में भी देशभर से 250 से अधिक शिल्पकारों ने शिरकत की थी। शिल्पकारों ने हर दिन यहां औसतन दस हजार रुपए की कमाई की। जबकि कई ऐसे भी थे, जिनकी कमाई 50 हजार से अधिक रही। सरस मेले में कश्मीर से आए मोहम्मद शौफी का कहना था कि वे दूसरी बार कुरुक्षेत्र आए। यहां का अनुभव शानदार रहा। वे चाहेंगे कि आगे भी उन्हें यहां स्टॉल लगाने का मौका मिले। बता दें कि सरस मेले में हस्तशिल्प के साथ साथ मशीनों द्वारा निर्मित सामान भी प्रदर्शन बिक्री के लिए रखा जाता है। जबकि शिल्प में हस्तशिल्प की ही बिक्री होती है।
कुरुक्षेत्र. कुरुक्षेत्र महोत्सव गीता जयंती के समापन के बाद स्वागत द्वार को हटाते कर्मचारी और विरान पड़ा ब्रह्मसरोवर।
भास्कर न्यूज|कुरुक्षेत्र
रविवारदेररात तक ब्रह्मसरोवर हजारों पर्यटकों की चहलकदमी से गुलजार था। लेकिन सोमवार को नजारा उल्टा दिखा। जहां तड़के से चहल पहल नजर आती थी। वहीं अब रौनक कम है। राष्ट्रीय सरस मेला रविवार रात को खत्म हो गया। सोमवार को जहां केडीबी कर्मचारी कुरुक्षेत्र उत्सव-गीता जयंती संबंधित होर्डिंग बोर्ड तट शहर की सड़कों से हटाते दिखे। वहीं तट पर सुबह शिल्पी अपना सामान समेटे हुए। सोमवार को केडीबी कर्मचारियों ने गीता जयंती समारोह के लगाए गए होर्डिंग बोर्डों को उतारना शुरू किया। कर्मचारी बीरा राम, मान सिंह, जगदीश अजय ने बताया कि केडीबी सीईओ पूजा भारती के निर्देश पर शहर भर से बोर्ड उतारे जा रहे हैं। ब्रह्मसरोवर, बिरला मंदिर, थर्ड गेट, पुराना