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नौ बरस की मेहनत के बाद नाभा हाउस को एएसआई ने दिया पुराना स्वरूप
छत पर भगवान ब्रह्मा का है 15 फुट ऊंचा मंदिर
>डेढ़ करोड़ खर्च कर मिली पुरानी पहचान
भास्करन्यूज| कुरुक्षेत्र
कुछबरसपहले तक कभी शहर की गौरवशाली इमारतों में शामिल नाभा हाउस खंडहर नजर आती थी। प्रशासनिक उपेक्षा और समय के थपेड़ों ने इस शानदार इमारत को नष्ट होने की तरफ धकेल दिया था। लेकिन अब नाभा हाउस का वही पुराना गौरव लौट आया है।
यह काम किया है आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, एएसआई ने। इसमें नौ बरसों तक एएसआई उसी बारीकी से काम करती रही जैसे कभी इसे बनाते समय किया गया होगा। डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा इस पर खर्च आया। नाभा हाउस अपनी बनावट के लिए दूर से ही पर्यटकों को आकर्षित करता है।
2005 में किया था एडॉप्ट
नाभाहाउस की बदहाली को लेकर विभिन्न संगठनों ने आवाज उठाई। सन 2005 में इसे एएसआई ने अपने अधीन लेकर संरक्षित स्मारक घोषित किया। एएसआई के कंर्जवेशन अस्सिटेंट केएन सेमवाल की देखरेख में इसके संरक्षण जीर्णोद्घार का काम शुरू हुआ। करीब डेढ़ करोड़ रुपए इसके जीर्णोद्घार पर खर्च हुए। पिछले हिस्से में पार्क को डेवलप किया जा रहा है।
सरकारी विभागों ने बिगाड़ दिया था गौरव
सन्निहितसरोवर किनारे बने नाभा हाउस का स्वरूप भी अनजाने में सरकारी विभागों ने ही बिगाड़ दिया था। आजादी के बाद यहां पहले तो कई बरसों तक सरकारी स्कूल खोलकर रखा। बाद में राजकीय श्रीकृष्णा आयुर्वेदिक कॉलेज इसमें स्थापित कर दिया, जोकि करीब दस सालों तक चला। कॉलेज प्रबंधन ने भी अपने मन मुताबिक बदलाव कर डाले। यहां गोदाम तक बनाए। वहीं दीवारों पर सीमेंट से प्लस्तर तक कर डाला था। बाद में आयुर्वेदिक कॉलेज उमरी रोड पर अपनी बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया।
महाराजा नाभा ने था बनवाया
कुरुक्षेत्रमें सूर्यग्रहण जैसे अवसरों पर राजा महाराजा भी लाव लश्कर के साथ स्नान करने आते थे। ऐसे में कई राजा महाराजाओं ने अपने-अपने ठहरने के लिए यहां महल रूपी इमारतें बनवाई थीं। इनमें पटियाला हाउस, फरीकोट हाउस के साथ ही नाभा हाउस शामिल है। पुरातत्वविद् एवं श्रीकृष्ण म्यूजियम के क्यूरेटर राजेंद्र सिंह राणा के मुताबिक यह मध्यकाल में बना था। यह 200 से अधिक साल पुरानी इमारत है। संभवत: यह नाभा के महाराजा हीरा सिंह के समय में बनी थी।
लाखौरी ईंटों से बना
पुरातत्वविद्जितेंद्र शर्मा के मुताबिक यह लाखौरी ईंटों से बना है। प्रवेशद्वार के अगले हिस्से पर टोडेदार महराब है। महराब के दोनों तरफ द्वारपाल बैठे हुए गणेश की प्रतिमा लगी है। दोनों स्तंभ कमल आकार के आधार पर टिके हैं। ऊपर भी कमलपुष्प मंडित है। छत पर भगवान ब्रह्मा का एक 15 फुट ऊंचा मंदिर है।