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अनहद नाद के मनन को बताया है ओंकार मनन : शक्तिदेव
कुरुक्षेत्र|जय ओंकारआश्रम के संस्थापक स्वामी शक्तिदेव ने कहा कि आत्मा में स्वभाविक हो रहे अनहद् नाद के श्रवण को बार-बार मनन करने को ही गुरु नानक ने ओंकार मनन कहा है। प्रभु प्राप्ति के अन्य मार्ग योग, ज्ञान, तप आदि से बाधाएं कई सकती हैं। विघ्र बाधा रहित मार्ग में प्रभु के प्रति निष्काम भक्ति राजपथ मार्ग बताया गया है। कलिकाल में परमात्मा ने सभी साधनों की शक्ति को नाम-जाप में सीमित कर दिया है। कलियुग केवल नाम आधारा, सुमिर-सुमिर होय जग पारा। जैसे कमरे में लगी घड़ी की टिक-टिक की आवाज बाहर संसार के भौतिक पदार्थों के शोरगुल से सुननी बंद हो जाती है। उसी प्रकार इस आत्मा में हो रही अनहद प्राकृतिक छवि (सहज संगीत राग) बाहर की भौतिक इच्छाओं विकारों के शोरगुल से सुननी बंद हो जाती है। संघ संचालक पं. शिव नारायण दीक्षित ने कहा कि हमें गुरु कृपा से ओंकार मनन में रमण करना चाहिए।