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स्वास्थ्य विभाग ने लैब को बताया अपने से अलग

7 वर्ष पहले
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डीसी कार्यालय ने लिया संज्ञान, कहा दें जानकारी

रमेशगर्ग | कुरुक्षेत्र

मेडिकलजांचमें अलग-अलग रिपोर्ट देकर लोगों को गुमराह करने वाली प्राइवेट लैब से अब स्वास्थ्य विभाग भी दूरियां बनाने लगा है। हालांकि शहर की सभी लैब स्वास्थ्य विभाग के अधीन है। लेकिन एक आरटीआई के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने लैब से पूरी तरह नाता तोड़ लिया। हर सवाल के जवाब में सिर्फ एक ही बात कही कि यह सूचना हमारे कार्यालय से संबंधित नहीं है। जबकि ऐसा नहीं है। आवेदक द्वारा मांगी गई सूचना जिला स्तर की है। जिसका रिकॉर्ड बड़ी आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की इस नासमझी पर डीसी कार्यालय से भी लेटर जारी किया गया और जल्द ही सूचना देने के निर्देश दिए। शहर में ऐसे कई मामले सामने चुके हैं, जिनमें प्राइवेट लैब में एक ही मरीज की अलग-अलग रिपोर्ट दी गई। जिससे लैब की कार्यशैली सवालों के घेरे में गई थी। इसके चलते एक व्यक्ति ने स्वास्थ्य विभाग से आरटीआई के माध्यम से लैब से संबंधित नौ सवाल पूछे। जिसमें अधिकतर जिला स्तर के ही प्रश्न थे। लेकिन विभाग ने सभी सवालों से पल्ला झाड़ लिया। सही जवाब मिलने पर आवेदक ने डीसी को पत्र लिखा। जिसमें डीसी ने सिविल अस्पताल को सूचना देने संबंधी निर्देश जारी किए।

डीसीने बताया सक्षम ऑथोरिटी : आवेदकविक्रम सिंह द्वारा डीसी को शिकायत करने पर दो सितंबर को डीसी कार्यालय से राज्य जन सूचना अधिकारी कम उप सिविल सर्जन चिकित्सा कुरुक्षेत्र को नोटिस भेजा कि इस विषयाधीन मामले में आप सक्षम अपीलेंट ऑथोरिटी हैं। इसलिए मामले की सूचना दी जाए।

स्वास्थ्यविभाग के अधीन हैं लैब : प्राइवेटलैब एसोसिएशन के प्रधान राम कुमार का कहना है कि शहर की सभी लैब स्वास्थ्य विभाग के अधीन हैं। इसलिए उनका पूरा रिकॉर्ड उन्हीं के पास मिलेगा। यदि स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी होने की असमर्थता जताई है तो इसके पीछे कोई कारण होगा।

साबित करना आसान नहीं : डॉ. ग्रेवाल

सिविलसर्जन डॉ. जितेंद्र ग्रेवाल का कहना है कि प्राइवेट लैब का सारा रिकॉर्ड उनके पास नहीं होता। जबकि प्राइवेट लैब द्वारा जारी रिपोर्ट को सही और गलत साबित करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गलत कार्य के लिए अलग-अलग अधिकारी कार्रवाई करता है। ऐसे में आरटीआई के सवालों का जवाब फोन पर देना भी मुश्किल है।

गलत रिपोर्ट मिलने पर नहीं होती कार्रव