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श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन संघर्षमय रहा : अनिल
गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति के द्वारा सपड़ा कालोनी में पितृ पक्ष के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह मंगलवार को हवन और भंडारे के साथ संपन्न हुआ। कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में आसुरी शक्तियों का विनाश करके धर्म की स्थापना की। कौरवों की सभा में पांचाली द्रौपदी की लाज बचाई और इसी महाभारत की भूमि कुरुक्षेत्र में पांडवों की सहायता करते हुए संसार को गीता का ज्ञान दिया। वास्तव में श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन संघर्षमय रहा।
उन्होंने कहा कि त्रेता युग में शरणागत वत्सल भगवान श्रीराम ने मर्यादा स्थापित की तो द्वापर युग में भक्तवत्सल श्रीकृष्ण ने भक्तों के आग्रह पर दुर्योधन के मेवों को त्यागकर विदुर के यहां साग-पूड़ी खाई। महाभारत के युद्ध में जब श्रीकृष्ण ने शस्त्र उठाने की प्रतिज्ञा की थी तब उन्हीं के भक्त पितामह भीष्म ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण से युद्ध में शस्त्र उठवा कर ही रहेंगे। तो भीष्म के वचन को पूरा करने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर भक्त के वचन को सच्चा साबित किया। कथावाचक अनिल शास्त्री ने श्रीकृष्ण का गृहस्थ जीवन, कृष्ण सुदामा मित्रता, दत्तात्रेय के 24 गुरु और श्रीमद्भागवत की शिक्षाएं प्रसंग भजनों सहित विस्तार से सुनाएं। कार्यक्रम में मुख्य यजमान हरियाणा ड्राई क्लीनर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण लाल मेहता आयोजकों ने भागवत जी को विश्राम देते हुए पत्रपुष्प, वस्त्र दक्षिणादि भेंट करके व्यासपीठ की परिक्रमा की। कथा में कृष्ण-सुदामा की आकर्षक झांकी दिखाई गई। इस अवसर पर शिवदयाल कौशिक, रोशनलाल अरोड़ा, आत्मप्रकाश चानना, हीरानंद, राजेंद्र मित्तल, धर्मपाल सिंगला, मांगेराम शर्मा, पालाराम, ओमप्रकाश शर्मा, लालचंद शर्मा, गोरेलाल गुजराल, संजय मेहता, निर्मल मैहता, कीर्ति, पीयूष, डॉ. स्वर्णप्रभा, सरिता, सरला, छाया देवी, रेनू लक्ष्मी ने हिस्सा लिया।