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शिव अराधना से पूरी होती है मनोकामनाएं : वत्स
सन्निहितसरोवरस्थित हरियाणा ब्राह्मण धर्मशाला एवं छात्रावास में बुधवार को भगवान परशुराम संस्कृत वेद पाठशाला द्वारा तीन दिवसीय पंच कुंडीय महारुद्र यज्ञ का शुभारंभ 108 पार्थिव शिवलिंग पूजन से हुआ। आचार्य पं. राजेश वत्स और पं. अमित मोदगिल ने बताया कि कार्यक्रम में सर्वप्रथम ब्रह्मलीन गुरुदेव पं. कलीराम शास्त्री वेदाचार्य को कई स्थानों से आए उनके शिष्य परिवार द्वारा श्रद्धांजलि दी गई।
गुरु माता शीला देवी, संस्कृत वेद पाठशाला नरकातारी के प्राचार्य पं. अनिरुद्ध शर्मा ज्योतिषी, नरकातारी रोड स्थित जयनारायण संस्कृत वेद पाठशाला के संचालक पं. शिव कुमार वेदपाठी और कुरुक्षेत्र संस्कृत वेद पाठशाला के प्राचार्य पं. नरेश कौशिक ने गुरुदेव कलीराम के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। श्रद्धांजलि के बाद यजमानों द्वारा 108 पार्थिव शिवलिंगों का पूजन एवं रुद्राभिषेक मंत्रोच्चारण द्वारा किया गया। वत्स ने बताया कि धर्मशास्त्रों के अनुसार आशुतोष भगवान शिव की अराधना, पूजा अनुष्ठान करने से मनुष्य की समस्त कामनाएं पूर्ण होती है। मौके पर नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा रमेश शास्त्री उपस्थित थे।
कुरुक्षेत्र हरिओम आश्रम में सुंदरकांड पाठ की आरती करते श्रद्धालु।
कुरुक्षेत्र |श्री माता अंजनि सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में कल्याणनगर स्थित श्री हरिओम आश्रम में संचालक सत्य प्रेम जिज्ञासु के सान्निध्य में 23वां संगीतमयी सुंदरकांड पाठ हुआ। ट्रस्ट के अध्यक्ष सोमनाथ कक्कड़ एडवोकेट ने बताया कि अगला सुंदरकांड पाठ इसी आश्रम में मंगलवार 17 फरवरी को दोपहर 3 से 5 बजे तक किया जाएगा। सुंदरकांड प्रवक्ता पं. राजेंद्र कौशिक ने प्रत्येक दोहे और चौपाई का सरलार्थ श्रद्धालुओं को बताया। सत्य प्रेम जिज्ञासु ने लोगों को पूजा के साथ-साथ गोसेवा हेतु सदैव तत्पर रहने की अपील की। सुंदर कांड आरती में कार्तिक कक्कड़, राज रानी, करूणा कक्कड़, कमलेश धीमान, कमल भारद्वाज, लखविंद्र पाल सिंह ग्रेवाल, डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र, जीता राम पाल, रिंकू शर्मा, हरभगवान भयाना, हिमांक तनेजा, संजय मोर, सुनील कुमार, सत्यप्रकाश, प्रेमचंद, धर्मपाल गर्ग, सूरजभान मेहरा, किरण शर्मा, सरिता, कुसुम शर्मा, संतोष, निर्मला देवी और सुषमा कौशिक भाग लिया।
कुरुक्षेत्र |पंचकुंडीय महारुद्र यज्ञ में पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करते यजमान।
कथा सुनाते कथावाचक दयागिरी
कुरुक्षेत्र |कालेश्वर महादेव मंदिर में शिवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन नारद मोह का चरित्र सुनाते कथावाचक दयागिरी बापू (गुजरात वाले) ने कहा कि देवर्षि नारद जब हिमालय पर्वत पर तपस्या में लीन होते हैं। तब देवराज इंद्र को चिंता हुई कि उन्हें अब लोक-परलोक के समाचार कौन सुनाएगा। इस पर इंद्र ने अप्सराओं को नारद की तपस्या भंग करने का आदेश दिया। कथा से पूर्व यजमानों ने संत वासुदेवानंद गिरी महाराज के सान्निध्य में सर्वदेव पूजन करके शिव पुराण की पूजा की।