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12 साल में ड्यूल डेस्क से टाट पर लौटे बच्चे

6 वर्ष पहले
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>जिलाभर के गवर्नमेंट स्कूलों में 2003 2005 में आए थे डेस्क

>रखरखाव के लिए बजट आने के कारण हो गए कबाड़

भास्करन्यूज | कुरुक्षेत्र

प्रदेशमेंविकास की उल्टी गंगा बह रही है। सरकार विकास के दावे करती नहीं थक रही लेकिन कड़वा सच ये है कि गवर्नमेंट स्कूलों में 12 साल पहले जहां विद्यार्थी ड्यूल डेस्क पर बैठकर पढ़ाई करते थे, वहीं अब विद्यार्थी टाट और घरों से लाए कट्टों पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। इससे साफ है कि 12 सालों में विकास की बजाए पिछड़ापन आया है। हालत यह है कि मौजूदा समय में अधिकतर स्कूलों में ड्यूल डेस्क कबाड़ हो चुके हैं, जिसके चलते उन्हें एक कमरे में बंद करके रखा गया है। ड्यूल डेस्क बच्चों के बैठने के काम आने तो दूर उल्टा उनके कमरे पर ही कब्जा कर लिया है। सरकार और विभाग योजनाओं को शुरू तो कर देता है लेकिन बाद में उसके रखरखाव के लिए बजट निर्धारित नहीं करता। जिसके कारण योजनाएं बेहतर होने के बावजूद दम तोड़ जाती हैं।

डिमांडमांगकर भूल जाता है विभाग : गवर्नमेंटस्कूलों से शिक्षा विभाग हर साल ड्यूल डेस्क के रख-रखाव और नए ड्यूल डेस्क की जरूरत को लेकर डिमांड जरूर मांगता है।

उसके बाद इसे भूल जाता है। इससे कई स्कूलों में बच्चों की संख्या भी 12 साल के दौरान बहुत अधिक बढ़ चुकी है लेकिन ड्यूल डेस्क पुरानी संख्या के अनुसार ही हैं जोकि कम पड़ जाते हैं। शिक्षा विभाग ने अब भी सभी स्कूलों से ड्यूल डेस्क की डिमांड मांगी है।

घरसे लाते हैं बच्चे कट्टे : राजकीयप्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान विनोद चौहान ने कहा कि स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने घरों से कट्टे लेकर आते हैं। वहीं कई स्कूलों में शिक्षकों ने अपनी जेब से पैसे खर्च करके टाट मंगवाए हुए हैं, ताकि बच्चों को कम से कम जमीन पर तो बैठना पड़े। चौहान ने कहा कि शिक्षा विभाग और सरकार योजना तो लागू कर देते हैं लेकिन उसके रखरखाव पर होने वाले खर्च का बजट बनाना भूल जाते हैं। अधिकतर योजनाओं के असफल होने का यही कारण है।

उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल को इतना बजट नहीं दिया जाता कि ड्यूल डेस्क को ठीक करवाया जा सके।

यहहै स्थिति : कुरुक्षेत्रमें प्राथमिक स्कूलों की संख्या 499 है, जिसमें 41 हजार 747 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। मिडल स्कूलों की संख्या 149, हाई स्कूलों की संख्या 49 और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 65 है। छठी से आठवीं कक्षा में 29 हजार 656 विद्यार्थी हैं। नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की संख्या 27 हजार 258 है।

सरकारने बनाई है योजना : लाडवाके विधायक डॉ. पवन सैनी ने कहा कि सभी स्कूलों में डेस्क उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने विस्तृत योजना तैयार की है। इस योजना के तहत वर्ष 2016 तक कोई भी विद्यार्थी स्कूलों में जमीन पर बैठकर नहीं पढ़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों की सुविधाओं को लेकर गंभीर है। जिसका असर आने वाले समय में देखने को मिलेगा।