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तांडव है सृष्टि विवर्तक शिवनृत्य : दयागिरी बापू

6 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र|नटराज कातांडव केवल प्रलय या संहार का ही नृत्य नहीं है, बल्कि सृष्टि और संहार के संतुलन के निमित निरंतर चलने वाला महानृत्य है। ये उद्गार कथावाचक दयागिरी बापू (गुजरात वाले) ने कालेश्वर महादेव मंदिर में शिवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कहे। कथा से पूर्व श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्वार सभा के उपप्रधान नीतिन भारद्वाज, कोषाध्यक्ष प्रदीप मिश्रा अन्य यजमानों ने संत वासुदेवानंद गिरी महाराज के सान्निध्य में सर्वदेव पूजन करके शिव पुराण की पूजा की। बताया कि नटराज का प्रलयनृत्य तो वह तभी होता है, जब शिव क्रुद्ध होते हैं। औढरदानी शिव अपने भक्तों पर कभी अप्रसन्न नहीं होते, लेकिन मानव जब प्रकृति धर्म के विरुद्ध आचरण करता है। तभी वे क्रुद्ध होते हैं। शिव कि डमरू स्वर से जीव में आत्मा का प्रवेश होता है और उनके पैरों की थाप से यह धरती अन्न, जल, फल-फूल की उत्पत्ति का कारण बनती है। नटराज शिव का नृत्य रुक जाए, तो समस्त सृष्टि ही विलीन हो जाएगी। शिव पुराण आरती में महेंद्र भारती, गिरधर गोपाल गिरी महाराज, आचार्य मनमोहन शास्त्री, नागेंद्र दास, संजीव शर्मा, सचिन शर्मा, पंडित ऋषिपाल भौर सैयदा, विक्रम भारद्वाज, अनुराग दंभड़, राधेश्याम, सुरेंद्र शास्त्री, रिंकू शर्मा उपस्थित थे।