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तांगे-बैलगाड़ियों से शुरू चुनावी सफर अब लग्जरी गाड़ियों तक
वर्ष1967 में हुए पहले विधानसभा चुनाव के बाद से लेकर अब तक समय के साथ सारी चीजें बदलती चली गई हैं। तांगे-बैलगाड़ियों से शुरू हुआ चुनाव प्रचार अब लग्जरी वाहनों तक पहुंच गया है। उस समय के चुनाव की यादें आज भी कुछ लोगों के जेहन में बसी हैं। शिक्षाविद वाईके माहेश्वरी का जन्म 11 सितंबर 1947 को हुआ। वे बताते हैं कि 1967 में हरियाणा में पहला विधानसभा चुनाव हुआ। उस समय वह 20 वर्ष के थे। चुनाव पहली बार हो रहा था, तो क्रेज भी कुछ ज्यादा ही था। 1967 में हुए पहले विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी वह जल्द ही गिर गई थी। इसके बाद फिर 1968 में विधानसभा चुनाव हुए। तब चुनाव में बहुत कम लोग सक्रिय रूप से भाग लेते थे। वह दौर ऐसा था कि चुनाव में गांव के दो-चार प्रमुख लोग आगे-आगे होते थे। उन्होंने जिस उम्मीदवार के लिए हां कह दी, तो पूरा इलाका उसे ही वोट देता था। तब ग्रामीण क्षेत्र के लोग चुनाव प्रचार में बैलगाड़ी या तांगे में बैठकर एक गांव से दूसरे गांव जाते थे। बैलगाड़ियों के गले में घुंघरूओं की माला बांधी जाती थी। बच्चे बैलगाड़ियों के पीछे भागते थे।
प्रचार के लिए उस समय तो लाउडस्पीकर होते थे और ही लग्जरी गाड़ियां। उस समय चुनाव बहुत ही शांतिपूर्वक होता था। ही कोई खूनखराबा होता था और ही ज्यादा शोरगुल।
वाईके माहेश्वरी