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नहीं बन सकी राय, वैश्य समाज की बैठक बेनतीजा

7 वर्ष पहले
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बुधवाररात चावला कॉलोनी स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित वैश्य समाज की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक चुनाव के दौरान समाज को एकजुट करने के लिए की गई थी। लेकिन हंगामे के कारण बैठक बेनतीजा रही। वैश्य नेताओं ने अलग-अलग पार्टी के नेताओं के समर्थन की पैरवी की। जिससे माहौल गड़बड़ा गया और कुछ वैश्य नेता नाराज होकर बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गए। चुनाव के दौरान किसी एक पार्टी के नेता का समर्थन किया जा सके, इसको लेकर शहर के वैश्य समाज को एकजुट करने के लिए वैश्य नेताओं ने बुधवार रात अग्रवाल धर्मशाला में बैठक का आयोजन किया था। बैठक में किसी भी दल के प्रत्याशी को नहीं बुलाया गया था। यह तय किया गया था कि जिसके नाम के समर्थन पर सहमति बनेगी, उसे बाद में बुला लिया जाएगा। पहले कुछ देर तो सब कुछ ठीक ठीक चलता रहा। लेकिन निर्दलीय लड़ने की घोषणा करने वाले एक वैश्य नेता वहां बैठक में पहुंच गए। उनके समर्थकों ने उनके जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। नारेबाजी होते देख कांग्रेस समर्थकों ने कांग्रेस प्रत्याशी के, इनेलो समर्थकों ने इनेलो प्रत्याशी के तथा भाजपा समर्थकों ने भाजपा प्रत्याशी के नारे लगाने शुरू कर दिए। इससे बैठक में हंगामा शुरू हो गया। वैश्य नेताओं में झड़प होनी शुरू हो गई। बैठक में अफरा-तफरी मच गई। बैठक में वैश्य समाज के चार गुट बन गए। आपस में काफी देर तक आरोप - प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। इसके बाद कुछ वैश्य नेता नाराज होकर बैठक का बहिष्कार कर चले गए। अन्य लोग भी उठ-उठकर चलते बने। बैठक बेनतीजा रही। गौरतलब है कि बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र में करीब 32 हजार वैश्य मतदाता हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता वैश्य समुदाय से ही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार जहां इनेलो ने वैश्य व्यापारी नेता को मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने भी यहां वैश्य बिरादरी के नेता को टिकट दी है। इसके अलावा पहले हजकां और फिर बसपा में शामिल रहने के बाद अब निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे एक अन्य वैश्य नेता भी मैदान में हैं। वही यहां से भाजपा प्रत्याशी की भी वैश्य बिरादरी के लोगों पर अच्छी पकड़ बताई जाती है।