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हिंदी मेरी मातृभाषा कविता को मिला प्रथम स्थान
हिंदी हमारे दिल में, मनाने की जरूरत नहीं : डॉ. राजेंद्र
छात्राओं को संबोधित करते मुख्य अतिथि राजेन्द्र सिंह।
गुडग़ांव. स्वागत गीत प्रस्तुत करतीं छात्राएं।
गुडग़ांव. हिंदी दिवस के मौके पर सेक्टर-14 स्थित राजकीय महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं।
भास्कर न्यूज | गुड़गांव
शनिवारको गर्ल्स कॉलेज में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि के रूप में गवर्नमेंट कॉलेज सिधरावली के सीनियर लेक्चरर डाॅ. राजेन्द्र सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत बीए प्रथम वर्ष की छात्राओं ने सरस्वती वंदना से की। कार्यक्रम के दौरान डा. राजेन्द्र सिंह ने छात्राओं को विशेष रूप से हिंदी कविता लिखने की कला के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कविताएं लिखना आसान है। बस मन के भावों को शब्दों में उतारो, कविता बन जाती है। इस अवसर पर कॉलेज की हिंदी लेक्चरर ने भी सभी छात्राओं को हिंदी में एसएमएस लिखने की प्रेरणा दी। मुख्य अतिथि डाॅ. राजेन्द्र सिंह ने कहा कि हिंदी की कविताएं पहले अत्यधिक समृद्ध थीं, लेकिन हिंदी कविताओं में हास्य और उसके बाद फूहड़पन शामिल हो गया। यह फूहड़पन हिंदी की कविताओं में अन्य भाषाओं के शामिल किए जाने से रहा है। अंग्रेजी भाषा सीखना गलत नहीं है, लेकिन हिंदी को भूलना बहुत गलत है। हिंदी हमारी आत्मा में होनी चाहिए। हमें हिंदी दिवस मनाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं आज भी विद्यार्थी हूं और कुछ कुछ सीखता रहता हूं।
हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है, इस पर हमारी पकड़ होनी चाहिए। आज हालात ऐसे हैं कि अधिकतर छात्र हिंदी में ही फेल हो रहे हैं। माता-पिता आज गर्व से कहते हैं कि हमारे बच्चे को अंग्रेजी तो आती है लेकिन हिंदी नहीं आती। जो आने वाले समय के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस अवसर पर हिंदी की लेक्चरर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा कि उनका संबोधन हिंदी में होता है, जो सराहनीय है। हमें उनसे सीखने की जरूरत है।
कबसे मनाया जाता है हिंदी दिवस
14सितंबर 1949 को संविधान सभा के दौरान हिंदी को राष्ट्र भाषा घोषित जाने के बाद से हिंदी दिवस मनाया जाता है, जो आज भी जारी है। हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।