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आशा वर्कर्स को छह माह से नहीं मिला मानदेय
क्षेत्रकी आशा वर्करों को छह माह से मानदेय मिलने से उनमें भारी निराशा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी ने इस बारे में जिला मेवात उपायुक्त को अवगत कराया।
जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की चिंता करने की जिम्मेवारी निभा रही आशा वर्करों के प्रति विभाग लापरवाह नजर रहा है। आशा वर्कर ग्रामीण क्षेत्रों में महिला द्वारा गर्भ धारण पर उसका पंजीकरण करती है और आठवें माह से ही आशा वर्कर उसका प्रसव अस्पताल में कराने की तैयारी में जुट जाती हैं। प्रसव के समय अस्पताल से एम्बुलेंस बुलाकर उसे साथ ले जाकर उसका प्रसव कराती हैं। बच्चा होने के बाद टीकाकरण कराना। प्रसव से 42 दिन तक छह बार जाकर जच्चा-बच्चा का निरीक्षण करती है। आशा वर्कर जच्चा-बच्चा के अलावा जनता के स्वास्थ्य के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रम जैसे पोलियो, टीकाकरण, टीबी, मलेरिया आदि बीमारियों के लिए चलाए जाने वाले अभियानों में भी पूर्ण सहयोग देती हैं। इतने लंबे और जिम्मेवारी से भरे कार्य के लिए सरकार आशा वर्करों को केवल पांच सौ रुपए मानदेय देती है। जनहित योजनाओं के लिए उन्हें प्रोत्साहन भी दी जाती है। प्रसव के समय दो सौ रुपए और प्रसव के बाद तीन बार जांच करने पर क्रमश: 150, 75 50 रुपए दिए जाते हैं। मानदेय के लिए आशा वर्कर बार-बार मांग कर चुकी है। लेकिन अभी तक आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला है, जिससे आशा वर्करों में निराशा है। आशा वर्कर मनीषा, सलमा, राजबाला, संतोष सुनीता ने बताया कि इस छोटे से मानदेय से अपनी गृहस्थी के छोटे-छोटे खर्चों में सहायता मिल जाती है। लेकिन छह माह से पैसा मिलने से वे बहुत परेशानी का अनुभव कर रही हैं। चिकित्सा अधिकारी डॉ. जावेद अहमद ने उपायुक्त मेवात को उक्त समस्या से अवगत कराया है।
उन्होंने बताया कि अभी तक फंड होने के कारण पैसा नहीं डाला गया है। उपायुक्त ने स्वयं देखने की बात कह समस्या को शीघ्र हल करने की बात कही है।