- Hindi News
- दिन भर हटाते हैं रात में दोबारा दिखने लगते हैं होर्डिंग
दिन भर हटाते हैं रात में दोबारा दिखने लगते हैं होर्डिंग
आचारसंहिता लागू होने के बाद होर्डिंग पोस्टर-बैनर को लेकर नेताजी और जिला प्रशासन के बीच चूहे-बिल्ली का खेल चल रहा है। आचार संहिता लागू होने से पहले तो नेताओं की मौज थी। वे जहां मर्जी विज्ञापन लगा देते थे। मगर, आचार संहिता लागू होने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। तोड़-फोड़ दस्ते दिन भर होर्डिंग बैनर हटाते हैं, वहीं चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोकने वाले नेता रातों-रात होर्डिंग लगवाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते हैं। प्रशासन की कार्रवाई बेअसर साबित हो रही है।
नगर निगम की टीम ने मंगलवार को इनफोर्समेंट विंग के इंचार्ज एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अमित श्योकंद के नेतृत्व में सोहना रोड, गोल्फ एक्सटेंशन रोड, घाटा रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग-8 पर झाड़सा चौक से लेकर खेड़की दौला टोल प्लाजा तक लगे विभिन्न राजनीतिक दलों के होर्डिंग्स पर कार्रवाई की। टीम ने इन स्थानों से 300 से अधिक राजनीतिक होर्डिंग हटाए। इस दौरान कुछ लोगों ने टीम की कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने अपनी प्रचार सामग्री स्वयं हटाने की बात कही, लेकिन टीम ने ऐसे लोगों की एक नहीं सुनी तथा पूरी कार्रवाई को शांतिपूर्ण प्रभावी ढंग से पूरा किया।
चुनाव खर्च में जुड़ेगा प्रचार सामग्री में लगा पैसा
प्रत्याशियोंद्वारा शहर में लगातार लगाए जा रहे बैनर-पोस्टर अन्य प्रचार सामग्री का खर्च चुनाव आयोग उनके चुनाव खर्च में जोड़ेगा। इस संबंध में एडीसी पुष्पेन्द्र सिंह चौहान का कहना है कि प्रत्याशियों द्वारा लगाए जा रहे बैनर-पोस्टरों का खर्च भी चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।
गुडग़ांव. एनएच-8 से उतारे गए पार्टी प्रत्याशियों द्वारा लगाए गए होर्डिग्स।
रातों-रात लगते हैं होर्डिंग
जिलाप्रशासन की ओर से जहां विभिन्न जगहों से राजनीतिक दलों के होर्डिंग हटाने का अभियान चलाया जाता है, वहीं नेताओं के समर्थक रातों रात खंभों, निजी भवनों दुकानों आदि पर दोबारा पोस्टर-बैनर होर्डिंग लगा देते हैं। जिला प्रशासन जितनी सक्रियता होर्डिंग्स हटाने में दिखा रहे हैं, वहीं नेताजी चुनावी मौसम में प्रचार-प्रसार के बिना कैसे रह सकते हैं।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी प्रत्याशियों द्वारा लगाए गए होर्डिंग्स उतारते निगम कर्मचारी।