खौफनाक था खाप का 'इंसाफ', मौत देकर कपल की बॉडी का किया था ये हाल

4 वर्ष पहले
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कैथल. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खाप पंचायत द्वारा दो एडल्ट्स को अपनी मर्जी से शादी करने से रोकने को गैरकानूनी करार दिया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ की बेंच ने यह लैंडमार्क जजमेंट लिया। बता दें कि शक्ति वाहिनी एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रेमी जोड़ों के खिलाफ दिए जाने वाले फरमानों के खिलाफ अपील की थी।

 

ऐसा भयानक था खाप पंचायत का फैसला, सगे भाई ने बहन को पिलाया था जहर

 

- जून 2007 में कैथल के कारोरा गांव की खाप पंचायत ने एक प्रेमी जोड़े को मार डालने का खौफनाक फैसला लिया था। 
- खाप पंचायत में लड़की के दादा भी शामिल थे। 
- पंचायत ने फरमान सुनाया था कि घरवालों के खिलाफ जाकर एक ही गोत्र में शादी करने वाले मनोज और बबली को जान से मार दिया जाए।
- फरमान जारी होते ही बबली के भाइयों ने उसे और उसके पति को किडनैप कर मौत के घाट उतार दिया था। बबली के सगे भाई ने उसे मारते हुए कीटनाशक पीने को मजबूर किया था।

 

मौत से दो साल पहले हुआ था प्यार

 

- बबली और मनोज कारोरा गांव में रहते थे। पूरा गांव बानवाला जाट समुदाय के लोगों का था। - मनोज गांव में मेकेनिक की दुकान चलाता था। उसका पूरा परिवार उसी दुकान पर निर्भर था।
- मनोज और बबली बचपन के दोस्त थे। मनोज की मां चंद्रपति के मुताबिक साल 2005 में दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगे थे।
- एक इंटरव्यू में चंद्रपति ने बताया था, "वो घंटों उससे फोन पर बातें करता था। जैसे ही मैं कमरे में पहुंचती, वो मुझे देखकर फोन काट देता और बाहर चला जाता। मैंने उसे कई बार समझाया कि बबली और उसका गोत्र एक ही है, इस वजह से शादी के लिए गांववाले कभी नहीं मानेंगे, लेकिन उसने मेरी बात नहीं सुनी।"
- इस रिश्ते को रोकने के लिए चंद्रपति ने बबली की मां से भी बात की थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

 

भागकर कर ली शादी

 

- 5 अप्रैल 2007 को मनोज की मां ने उसे अंतिम बार जिंदा देखा था। उसका 12वीं क्लास का एग्जाम था। मां को लगा कि वो एग्जाम के लिए ही जा रहा है, लेकिन मनोज के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।
- मनोज और बबली ने घर से भागकर चंडीगढ़ में 7 अप्रैल 2007 को शादी कर ली थी।
- शादी से गुस्साए बबली के परिजन मदद मांगने खाप पंचायत के पास पहुंचे। पंचायत ने मनोज के परिवार को समाज से बहिष्कृत करने का फरमान सुना दिया। साथ ही कहा कि उस परिवार की मदद करने वाले या संबंध रखने वाले को 25 हजार रुपए का जुर्माना भरना होगा। 
- बबली के परिवार ने 26 अप्रैल 2007 को मनोज के खिलाफ उनकी बेटी को किडनैप करने की पुलिस कंप्लेंट भी दर्ज करवा दी।
- मनोज और बबली ने 15 जून 2007 को कोर्ट पहुंचकर अपनी शादी की बात कही। कोर्ट ने शादी को वैध करार देते हुए दोनों को पुलिस प्रॉटेक्शन देने का ऑर्डर जारी किया।

 

छोड़कर भाग गई थी पुलिस, ऐसे हुआ दोनों का मर्डर

 

- कोर्ट से पुलिस प्रॉटेक्शन का ऑर्डर मिलने के बाद पांच पुलिस वाले दोनों को साथ में लेकर चंडीगढ़ के लिए बस से रवाना हुए।
- पिपली बस स्टॉप पर पुलिसवाले दोनों को अकेला छोड़कर चले गए। मनोज को शक हुआ कि उनके खिलाफ कोई साजिश हो रही है। उसने चंडीगढ़ वाली बस छोड़ दूसरी पकड़ ली।
- दूसरी बस लेने से पहले उसने अपनी मां को फोन कर बताया कि पुलिसवाले गायब हो गए हैं और बबली के घरवाले उनका पीछा कर रहे हैं। इसलिए अब वो चंडीगढ़ की जगह दिल्ली जा रहा है।
- बबली ने भी अपनी सास से पूछा था कि क्या वो उसे स्वीकार करेंगी। इस पर चंद्रपति ने हां में जवाब दिया था।
- पिपली से महज 20 किमी दूर रायपुर के जतन गांव के पास बबली के घरवालों ने बस को रोका। वे बबली और मनोज को एक SUV में बैठाकर वापस गांव ले जाया गया।
- बबली के भाई ने उसे पहले पीटा। फिर कीटनाशक दवा जबरदस्ती पिला दी।
- वहीं दूसरी तरफ मनोज को भी बर्बरता से पीटा गया। फिर गला घोंटकर उसकी सांसे छीन ली गईं।
- मौत के बाद दोनों के शरीर हाथ-पैर बांधकर और बोरे में भरकर वहीं एक नहर में फेंक दिए गए।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कांड के लिए खाप पंचायत ने फरमान सुनाया था।
- दोनों की लाशें 9 दिन बाद 23 जून 2007 को मिली थीं। शवों की पहचान बबली की पायल और मनोज की शर्ट से हुई थी। 

 

33 महीने, 50 सुनवाई के बाद मिला था इंसाफ

 

- 29 मार्च 2010 को करनाल जिला कोर्ट ने मनोज और बबली के हत्यारों को फांसी की सजा सुनाई थी।
- दोनों को इंसाफ मिलने में 33 महीने का वक्त लगा था। इस दौरान केस की 50 सुनवाई हुईं, जिनमें लगभग 41 लोगों ने गवाही दी थी।
- कोर्ट ने मनोज की मां चंद्रपति को 1 लाख रुपए मुआवजे का आदेश सुनाया था। साथ हीबबली के दादा गंगा राज, जो कि उस खाप पंचायत के लीडर भी थे, उन पर 16 हजार रु. और 6 अन्य दोषियों पर 6-6 हजार रु. का जुर्माना लगाया गया था। 
- आदेश के बावजूद बबली-मनोज को अकेला छोड़ने वाले पुलिसवालों पर भी कार्रवाई हुई थी।

 

पहला केस जिसमें खाप पंचायत के खिलाफ हुआ एक्शन

 

- भारत के इतिहास का यह पहला ऐसा मामला था जहां कोर्ट ने खाप पंचायत के खिलाफ एक्शन लिया था। साथ ही पहली बार ऑनर किलिंग मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। 
- इस केस पर बॉलीवुड में 'खाप', 'NH-10' और 'गुड्डू रंगीला' फिल्में भी बनीं।
- मार्च 2010 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बबली के भाई सुरेश समेत 4 आरोपियों की मौत की सजा को उम्रकैद में परिवर्तित कर दिया था। वहीं, बबली के दादा गंगा राज और एक अन्य आरोपी को केस से बरी कर दिया गया।

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