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अहंकार आत्मा और परमात्मा के बीच दीवार : मुनि कुलदीप

7 वर्ष पहले
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अहंकारकी आंखें नहीं होती वह अंधा होता है। वह चल तो सकता है, पर देख नहीं सकता। इसी तरह अहंकारियों की स्थिति अंधे जैसी ही होती है। यह विचार मॉडल टाउन स्थित जैन तेरापंथ भवन में आचार्य महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनि कुलदीप कुमार ने मानव जीवन में अहंकार के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए श्रावक- श्राविकाओं से कहें।

जैन मुनि ने कहा कि उन्होंने अहंकारी रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरी लंका तबाह हो रही थी लेकिन रावण को लंका की तबाही और अपने खानदान की बर्बादी नहीं दिखाई दे रही थी। उन्होंने कंस का भी उदाहरण देकर अहंकार पर प्रकाश डाला। जिस पर अहंकार सवार हो जाता है वह अंधे के समान हो जाता है। जैन मुनि ने कहा कि अहंकार से बचने का हर संभव प्रयास करों, क्योंकि अहंकार आत्मा और परमात्मा के बीच दीवार का काम करता है।

मुनि संभव कुमार ने कहा कि आज दांपत्य, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में संघर्ष, मनमुटाव, मनोमालिन्य दिख रहा है। इसका मूल कारण अहंकार है।

इस दौरान घीसाराम जैन, श्यामलाल जैन, सुभाष मित्तल, प्यारेलाल जैन, महावीर असरावां, देवराज जैन, सतीश गोयल, कांता बंसल, संतोष गोयल, मीनाक्षी जैन, उमा जैन, संजना गोयल, दीपक गोयल, आदित्य गोयल, नीटू गोयल आदि मौजूद थे।

जीवित भगवान को देखना है तो मां-पिता में देखो

मुनिमुकुल कुमार ने कहा कि जीवित भगवान को देखना है तो घर में मां के रूप में देखो और पाषाण के भगवान को देखना है तो मंदिर में देखो। बाजार में सब कुछ मिल सकता है, लेकिन मां-बाप कभी नहीं मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किलें तमाम आएंगी, मां की दुआएं ले जा, तेरे बहुत काम आएंगे। उन्होंने कहा कि एक बार किसी ने चित्रकार से कहा कि मेरी मां की तस्वीर बना दो। चित्रकार ने कहा कि मुझे माफ करो, मैं उसका चित्र नहीं बना सकता, जिसने मुझे बनाया है। समुंदर ने कहा कि मैं किसी के राज नहीं छुपा सकता, जबकि मां वह होती है, जो सबके गुनाह छुपा लेती है।