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फूल की जगह रक्तदान कर प्यार का इजहार करेंगे

6 वर्ष पहले
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भलेही वेलेंटाइन-डे अपने प्रेमी के प्रति प्यार का इजहार करने का दिन माना जाता है और लोग फूल से अपने प्यार का इजहार करते हों, मगर आदमपुर में इस दिन को बड़े ही अनोखे तरीके से मनाया जाता है। यहां पर युवा अपने प्यार का इजहार फूल देकर नहीं बल्कि रक्तदान करके करते हैं। प्यार का इजहार भी उन लोगों के लिए किया जाता है, जो सरहद पर खड़े होकर देश की रक्षा करते हैं।

दरअसल, आदमपुर के शहीद भगतसिंह युवा मंडल की ओर से वेलेंटाइन-डे की पूर्व संध्या पर भारतीय सेना के जवानों के लिए लगाए जाने वाले रक्तदान शिविर में इसी तरह की बानगी देखने को मिलती है। पिछले तीन सालों से यह क्रम लगातार जारी है। इस बार भी 13 फरवरी को एक बार फिर से फौजियों के लिए प्यार का इजहार करने युवाओं का हुजूम उमड़ेगा। खास बात यह है कि हरियाणा में सेना के लिए ऐसा रक्तदान शिविर डेरा सच्चा सौदा सिरसा को छोड़कर केवल आदमपुर में ही लगता है।

40 युवाओं की टीम करती है मेहनत

युवामंडल के कोषाध्यक्ष जीत भदरेचा बताते हैं कि युवा मंडल में शामिल 40 युवाओं की टीम इस शिविर का सफल बनाने के लिए करीब एक महीने तक मेहनत करती है। रक्तदाताओं के पंजीकरण से लेकर उनकी रिफ्रेशमेंट तक का व्यापक स्तर पर प्रबंध किया जाता है।

नियमित रक्तदाता तैयार करना लक्ष्य : शर्मा

शिविरके संयोजक प्राध्यापक नरेश शर्मा कहते हैं कि नियमित रक्तदाता तैयार करना ही उनके युवा मंडल का लक्ष्य है और इसमें कामयाबी भी मिल रही है। अब हर तीसरे महीने रक्तदान करने के लिए लोग तैयार रहते हैं। महिला रक्तदाताओं का भी एक विशाल समूह तैयार हुआ है। क्षेत्र का हर 18 साल पार कर चुका युवा रक्तदान के लिए जागरूक हो चुका है।

पिछली बार 1026 लोगों ने किया था रक्तदान

पिछलेतीन सालों से भारतीय सेना के जवानों के लिए आदमपुर में रक्तदान शिविर लगाने का क्रम जारी है। इस शिविर में रक्त एकत्रित करने के लिए नई दिल्ली कैंट स्थित आर्मंड फोर्सेज ट्रांसफ्यूजन सेंटर की टीम लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में आती है। पिछली बार 13 फरवरी 2014 को 1026 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर आदमपुर क्षेत्र में रक्तदान का रिकॉर्ड कायम किया था। यह ग्रामीण क्षेत्र का जिले का सबसे बड़ा रक्तदान शिविर था। इससे पहले 2013 में 850 और 2012 में 720 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया था।

युवाओं ने वेलेंटाइन-डे को इस अंदाज में मनाते हुए केवल अनूठी पहल की है, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का काम किया है। इस युवा मंडल ने 2012 में पहली बार भारतीय सेना के जवानों की सहायतार्थ पहला रक्तदान शिविर लगाया था। इसके बाद 2013 और 2014 में भी इसी दिन यह शिविर लगाया गया। आदमपुर कस्बे के साथ-साथ आसपास के अनेक गांवों से युवा फौजियों के लिए रक्तदान करने पहुंचते हैं। आलम यह रहता है कि रक्तदान करने के इच्छुक ज्यादा होते हैं, जबकि रक्त लेने आने वाली टीमें हाथ खड़े कर देती है। शिविर के दौरान युवाओं में अपने सैनिकों के लिए समर्पण की अनोखी बानगी देखने को मिलती है।