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पांच साल में 15 मीटर गिरा जिले का भूजल

7 वर्ष पहले
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लगातार भूमिगत जल स्तर गिरता जा रहा है। विभाग की ओर से गांवों में जो ट्यूबवेल लगाए गए थे, वे भी सूखते जा रहे हैं। इसी लिए नहरी पानी आधारित पेयजल योजना बनाई गई है। जिससे नांगल चौधरी के 64 और नारनौल के 54 गांवों को कैनाल स्कीम का पानी देने की तैयारी चल रही है। यह प्रोजेक्ट पूरा होने की दिशा में अग्रसर है। -दलबीरसिंह, एक्सईएन,जनस्वास्थ्य विभाग, वाटर प्रोजेक्ट नारनौल।

केंद्रीय भू जल प्राधिकरण भी जिले में गिरते वाटर लेवल को लेकर चिंतित है। एक दशक पहले नांगल चौधरी और नारनौल को डार्क जोन में शामिल किया गया था। उसके बाद अटेली, महेंद्रगढ़ और कनीना खंड भी डार्क जोन में शामिल कर दिए गए। डार्क जोन का अर्थ है कि बिना प्राधिकरण की मंजूरी के जिले में नया नलकूप नहीं लगाया जा सकता। सूत्रों के मुताबिक सख्ती के बावजूद अपनी फसल को बचाने के लिए या खेती से आमदनी पाने के लिए किसान चोरी छुपे ट्यूबवेल भी लगाते हैं और पानी भी निकाल कर उससे सिंचाई भी करते हैं। उनका तर्क है कि नहरों में पानी आता नहीं, बरसात कितनी आएगी, इसकी कोई सही स्थिति नहीं जानता। इस लिए फसल को बर्बादी से रोकने के लिए पानी तो चाहिए ही।

पेयजल संकट

भास्कर न्यूज | नारनौल

जिलेमें पानी का भूमिगत जल स्तर प्रतिवर्ष नीचे जा रहा है। इस गिरते वाटर लेवल के चलते पेयजल की सप्लाई नहरों पर आधारित होती जा रही है। नहरी पानी भी आवश्यकता से कम मिलने का असर फसल पर भी नजर आता है।

जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में इलाके का भूमिगत जल स्तर 15 मीटर से नीचे जा चुका है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नांगल चौधरी जैसे इलाकों मे 1600 फीट की खुदाई के बाद भी पानी नहीं मिला। दूसरे बरसात होने के कारण जमीनी पानी का ही इस्तेमाल लोग खेती के लिए करते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनस्वास्थ्य विभाग के प्रति वर्ष जिले में 35 से 40 ट्यूबवेल सूख रहे हैं। जबकि किसानों के ट्यूबवेल सूखने की संख्या प्रतिवर्ष 100 से अधिक रहती है। जिले के 376 गांवों में से एक तिहाई में जनस्वास्थ्य विभाग कैनाल बेस स्कीम से पानी सप्लाई कर रहा है।

पानी की सबसे ज्यादा समस्या नांगल चौधरी क्षेत्र में है। यहां के नांगल पीपा, नौलायजा, बसीरपुर, नांगल दुर्गु, टहला और दोहान 25 क्षेत्र के दोहर कलां, भाखरी, गोद, बलाहा, जाखनी, जैलाफ जैसे गांवों में 1हजार फी