खंड को डेढ़ साल से अधिकारी का इंतजार
करीबडेढ़ साल पहले जब सीहमा को खंड बनाया गया था तो यहां के नजदीकी गांव वालों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें अपने काम के लिए नारनौल की दौड नहीं लगानी पडेगी। उनकी यह हसरत आज भी अधूरी है। सरकारी तौर पर नारनौल अटेली के कुछ गांवों को जोडकर सीहमा खंड घोषित तो कर दिया गया, किंतु अभी तक कर्मचारी तो दूर अधिकारी भी इस खंड को नहीं मिला है।
निकटवर्ती 30 गांवों को मिलाकर 20 मई 2012 को यह विकास खंड बनाया गया था। गांवों को विकास करने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने जिले अटेली नारनौल विकास खंड के गांवों को मिलाकर सीहमा नया विकास खंड बनाया गया था। 2 साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी खंड को स्थाई बीडीपीओ को पद नहीं मिला है। इसके अलावा कार्यालय में अनेक पद भी रिक्त पडे है। रिक्त पदों में स्वंय बीडीपीओ, 1 एससीपीओं,1 लेखाकार, 1 क्लर्क,1 स्टैनो,1 पटवारी 1 जेई है। इसके अलावा ब्लॉक में सेवादार, चौकीदार ड्राईवर के पद स्वीकृत ही नहीं है। जिसके कारण विकास कार्याें को अमलीजामा पहनाने के लिए काफी कठिनाई हो रही है।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणोंका कहना है कि सरकार ने अगर कार्यालयों में स्टॉफ की नियुक्ति ही नहीं करनी थी तो नया विकास खंड क्यों बनाया गया। सरकार वाही-वाही लूटने के लिए नई-नई घोषणा तो कर देते हैं, लेकिन उनको मूर्त रूप देने में संतोषजनक रूप में कार्य नहीं करती। डीडीपीओ दीपक यादव ने बताया कि पदों की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को सूचित किया हुआ है। विकास खंड का कार्य प्रभावित हो इसके लिए नारनौल बीडीपीओ को सीहमा खंड का अतिरिक्त चार्ज दिया हुआ है।