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पातवान ट्रिपल मर्डर में फांसी वालों को उम्रकैद, आजीवन कारावास वाले बरी
पातवानगांव में जुलाई 2011 में हुए ट्रिपल मर्डर मामले में हाइकोर्ट ने भिवानी की अदालत के फैसले को पूरा बदल दिया है। बुधवार को हाइकोर्ट के न्यायाधीश एम जयपाल की खंडपीठ की ओर से सुनाए फैसले में भिवानी की अदालत से फांसी की सजा पाए चार दोषियों की सजा उम्रकैद में बदल दी है। वहीं भिवानी की अदालत की ओर से उम्रकैद की सजा सुनाए 10 दोषियों को बरी कर दिया है।
अदालत में चले मुकदमे के अनुसार सात जुलाई 2011 को पातवान निवासी विधवा संतोष और उसके दो बेटे राजेश और जसवंत अपने मकान की छत पर सोए हुए थे। उनका परिवार के लोगों के साथ ही जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। इसी कारण दूसरे पक्ष के लोगों ने उस रात उनकी छत पर चढ़कर तीनों मां बेटों की कुल्हाडिय़ों से काटकर हत्या कर दी। इस हत्या का खुलासा 10 जुलाई 2011 को उस समय हुआ जब लोगों को उनके बंद मकान से बदबू आने लगी। इस पर गांव के लोगों ने इसकी सूचना बहल पुलिस को दी थी। पुलिस ने सूचना के आधार पर मौके पर जाकर तीनों मां बेटों के शवों को कब्जे में ले लिया था।
इसके बाद पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों मृतका के जेठ इंद्र, उसकी प|ी बिमला, बेटे शमशेर के अलावा परिवार के देवरानी संतोष, देवर धूप सिंह और उसकी प|ी सुनीता, नीलम प|ी कुलदीप, विजय पुत्र उमेद, रामकुमार और उसके भाई हरिसिंह, जगत सिंह, मंजीत और उसके भाई दलबीर और नीलम के पति कुलदीप के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद भिवानी की तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरिता गुप्ता की अदालत ने इस मामले में पिछले साल सात जुलाई को चार दोषियों हरिसिंह, कुलदीप, शमशेर और दलबीर काे फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा बाकी बचे 10 दोषियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसके बाद आरोपित पक्ष इस मामले को हाइकोर्ट में ले गया। वहां यह मामला इन दिनों रिटायरमेंट के नजदीक बैठे न्यायाधीश एम जयपाल की खंडपीठ में चल रहा था। उस खंडपीठ ने इस मामले में भिवानी की अदालत की ओर से फांसी की सजा पाए चारों दोषियों हरिसिंह, कुलदीप, दलबीर और शमशेर की सजा उम्रकैद में बदल दी। वहीं भिवानी की अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा पाए सभी 10 दोषियों इंद्र, बिमला, संतोष, सुनीता, नीलम, विजय, रामकुमार, धूप सिंह, जगत सिंह और मंजीत को अदालत ने बरी करने का फैसला सुनाया है।
येथा मामला
पातवाननिवासी मृ