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आठ नहीं नौ दिनों तक होगी मां की पूजा

7 वर्ष पहले
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भिवानी। आज से शारदीय नवरात्र आरंभ होने जा रहे हैं। 16 दिनों तक श्राद्ध रहने के कारण बाजारों में भी रौनक देखने को नहीं मिल रही थी 25 सितंबर यानि आज से बाजार जहां माता के श्रृंगार के सामान से सजे हुए हैं तो वहीं मंदिरों को भी सजाया गया है। इन सब के विपरीत इस बार लोगों में इस बात को लेकर असमंजस बना हुआ है कि नवरात्र आठ है या नौ पंडितों की माने तो इस बार भी मां की पूजा नौ दिनों तक ही होगी। नौ दिन तक महिलाएं मां दुर्गा से अपने परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना करेंगी।
अक्टूबर माह में ही पत्नी करवा चौथ का व्रत रख अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करेंगी तो बहनें भी भैया दूज पर अपने भाईयों की सुख समृद्धि लंबी उम्र की कामना करेंगी। पंडित कृष्ण कुमार बहल वाले ने बताया कि मां के नवरात्रों के आगमन के साथ लंबे समय से अच्छे दिनों की आस कर रहे लोगों की प्रतीक्षा भी खत्म हो हो जाएगी।
जौबीजना है शुभ : नई वस्तुओं की खरीददारी के साथ कोई भी नया कार्य करने में अब कोई दिक्कत नहीं आएगी। मां का नाम लेकर कोई भी शुभ कार्य सफलता पूर्वक किया जा सकेगा। पंडित कृष्ण कुमार ने बताया कि नवरात्रों में पहले ही दिन मिट्टी के कुल्हड़ में जौ बीजे जाते हैं जब तीसरे दिन वे अंकुरित हो जाएं तो उन्हें देखकर शुभ विचार करें। जौ हरे रंग के हो जाएं तो धन - धान्य प्राप्त होना निश्चित है। सफेद रंग के हैं तो श्रेष्ठ हैं। इस विपरीत आधे अंकुरित और आधे पीले हैं तो काम में बाधा, जौ नहीं उगना, कार्यों में बाधा के सूचक माने गए हैं।

स्टील के लोटे को बनाएं कलश :पंडितकृष्ण कुमार बहल वाले ने बताया कि 25 सितम्बर को सूर्योदय के बाद 10:19 से 12:38 वृश्चिक लगन विशेष शुभ रहेगा। इसके बीच कभी भी पानी वाला नारियल लाल वस्त्र में लपेट कर उसे कलश पर रखकर कलश स्थापना करें। कलश स्थापना के लिए कलश मिट्टी, चांदी या पीतल का होना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्टील के लोटे को कलश बनाएं क्योंकि स्टील को शनि का प्रतीक माना गया है। कलश स्थापित करने के बाद गणेश जी मां दुर्गा की पूजा करें। बाल खुले रखकर मां की आराधना करें ।

कन्याओंका पूजन करें : पंडित कृष्ण कुमार ने बताया कि दो वर्ष तक की कन्या को कौमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति , चार वर्ष की कल्याणी, 5 की रोहिणी, 6 की कालिका, 7 की चंडिका, 8 की शांभवी, नौ वर्ष की दुर्गा दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा माना गया है। इसीलिए नवरात्रों में 10 वर्ष तक की कन्याओं को पूजने का महत्व है।
इस मंत्र के जाप से मिलेगा मनवांछित फल : पंडित कृष्ण कुमार ने बताया कि मां को खुश करने के लिए ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चै नमः।। मंत्र का उच्चारण करें। इसके अलावा पानी का नारियल लेकर उसकी छाल उतार कर माता के सामने रख दे और अपनी मनोकामना मांगे। जिस दिन भी नारियल खंडित हो जाए उसी दिन समझ लेना कि मां ने पुकार सुन ली और नारियल को तोड़कर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

इस तरह रहेंगे इस बार नवरात्र
25- घटस्थापना, नवरात्र
26 - द्वितीया
27 - तृतीया
28 - चतुर्थी
29 - पंचमी
30 - षष्ठी
01 - सप्तमी
02 - महाष्टमी
03 - महानवमी और दशहरा।

(नया बाजार में नवरात्रों की पूर्व संध्या पर सजाया गया भोजावाली देवी माता मंदिर। यहां पर श्रद्धालुओं द्वारा लगभग पांच सौ अखंड ज्योतें जलाई जाती है। )