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भिवानी, बहल और ढिगावा मंडी में फसलों की गिरदावरी और बिजली समस्या को लेकर जताया रोष

7 वर्ष पहले
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(सचिवालय परिसर के बाहर अखिल भारतीय किसान सभा के धरने के दौरान नारेबाजी करते)
भिवानी। कपास और ग्वार की फसल में आई जड़ग्लन और उखेड़ा रोग की बीमारी से जिले के किसानों की लाखों रुपयों की फसल बर्बाद हो गई। इसलिए सरकार इस बीमारी से बर्बाद हुई फसल को भी सूखाग्रस्त फसल में शामिल किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ को किसान इसके लिए आंदोलन करेंगे। इसी मांग को लेकर किसान सभा ने सोमवार को पहले लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन एसडीएम संजय राय को दिया।
सरकार ने पहले ही कम दिया था मुआवजा
इससेपहले धरने और प्रदर्शन को संबोधित करते हुए इसकी अध्यक्षता कर रहे मास्टर शेर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित किया था। मगर सरकार ने उसके लिए मात्र चार हजार रुपये प्रति एकड़ ही मुआवजे की घोषणा की थी। इसलिए उस राशि से तो किसानों के बीज, खाद और दवाइयों का खर्चा भी पूरा नहीं होने वाला। इसके बाद इस महीने आई बेमौसमी बारिश के कारण जिले के किसानों की कपास और ग्वार की फसल भी बीमारियों की चपेट में आकर बर्बाद हो गई।
उन्होंने कहा कि पहले से ही सूखे की मार झेल रहे किसानों ने किसी तरह इस फसल को बचाया हुआ था। मगर इन फसलों में आई बीमारी ने किसानों की आखिरी उम्मीद पर भी पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब विधानसभा चुनावों की घोषणा होने के कारण चुनाव आचार संहिता लग गई। मगर दूसरी ओर किसान अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। वे तो इस बारे में सरकार से कुछ मांग सकते और ही नेताओं का इस ओर ध्यान जा रहा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए इस मामले को लेकर प्रदेश की सभी पार्टियों के नेताओं को मिलकर ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे किसानों को बीमारी से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा मिल सके।
किसानों को उचित मुआवजा दे सरकार
शेरसिंह ने कहा कि इन दोनों ही फसलों को अब तक संभालने में किसानों ने प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपये खर्च किए हुए हैं। इसलिए प्रशासन या सरकार इस मामले को लेकर कपास और ग्वार फसल की स्पेशल गिरदावरी करा किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार रुपये मुआवजा दिलाए ताकि किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या के लिए मजबूर हों। इसी मांग को लेकर उन्होंने एसडीएम संजय राय को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उनके साथ कैप्टन ईश्वर सिंह, मानसिंह, ओमप्रकाश सैनी, कुलभूषण आर्य और अमर सिंह आदि थे।

ढिगावा मंडी में महापंचायत
बहल में किसानों ने किया प्रदर्शन
जिले के किसानों ने मांगों को लेकर दिए धरने
किसान और बिजली कर्मचारी एक बार फिर आमने सामने आए
ढिगावा मंडी। ढिगावा क्षेत्र में बिजली की समस्या को लेकर किसान और बिजली कर्मचारी एक बार फिर आमने सामने हो गए हैं। इस समस्या को लेकर सोमवार को क्षेत्र के किसानों ने धरना देते हुए प्रदर्शन किया। इसके अलावा मंगलवार को किसानों ने यहां महापंचायत बुलाने का फैसला लिया है।

किसानों को संबोधित करते हुए भाकियू के जिला प्रधान मेवासिंह ने कहा कि किसानों की बिजली समस्याओं को बार बार उठाने के बावजूद निगम द्वारा उनकी समस्याओं मांगों का समाधान नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल नौ सितंबर को भिवानी में निगम के उच्चाधिकारी से मिलकर किसानों की बिजली संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए अवगत करा चुके हैं। एसई ने उनकी मांगों समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया था। इसके बाद किसानों ने ११ सितंबर को बरालू के 33 केवी सब स्टेशन का घेराव भी किया।
इसके बावजूद निगम द्वारा उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। इस दौरान ढिगावा जोन प्रधान आजाद सिंह ने कहा कि किसानों के जले हुए ट्रांसफार्मर शीघ्र बदलवाने, बिजली शैड्यूल में बदलाव, पर्याप्त बिजली आपूर्ति आदि मांगों के बारे में निगम को कई बार बताया जा चुका है। इस मौके पर हवा सिंह बड़दू, लोहारू प्रधान धर्मपाल बारवास, मातूराम कुड़ल, बलवान यादव, अशोक बुढेडा़ बास, रामप्रसाद भूंगला मौजूद थे।
मांगें माने जाने पर 22 सितंबर को फिर धरने की चेतावनी
बहल । अखिल भारतीय किसान सभा ने सोमवार को अनाज मंडी में किसानों की फसलों की गिरदावरी और अन्य मांगों के समर्थन में धरना देते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो यहां 22 सितंबर को दोबारा धरना दिया जाएगा। सोमवार को दिए धरने की अध्यक्षता ब्लाक उप प्रधान धर्मपाल ने की संचालन सुशील नांगल ने किया।

इसके अलावा सूखे के हालातों का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम को किसान चंद्रभान मंढोली कलां ने बर्बाद हुई फसलों की जानकारी दी। इस बारे में उन्होंने इस धरने में अपने द्वारा दी गई जानकारी के बारे में किसानों को अवगत कराया। इस दौरान किसानों ने मांग करते हुए कहा कि जब राजस्व विभाग द्वारा किसी गांव के रकबे की स्पेशल गिरदावरी कराई जाए उसके लिए कम से कम तीन दिन पहले मुनादी कराई जाए।
इसके अलावा गिरदावरी रिपोर्ट पर किसानों के हस्ताक्षर कराएं जाए तथा मौके पर ही उसकी गिरदावरी की रसीद दी जाए। किसानों ने कहा कि अगर उनकी मांगों को 21 सितंबर तक पूरा नहीं किया तो अखिल भारतीय किसान सभा 22 सितंबर को यहां फिर धरना देकर आगे की रणनीति तैयार करेगी। इस मौके पर धर्मवीर हरियावास, प्रताप, रामकुमार गोपालवास, रामंचद्र, इंद्र ढाणी, महीपाल, कृष्ण, दलवीर, महाबीर, सूबे सिंह, ईश्वर सिंह, महेन्द्र, रोहताश, महाबीर, हवासिंह, बलबीर आदि थे।