बराड़ा (अंबाला)। विधानसभा चुनावों की खुमारी अभी उतरी नही है और पंचायती चुनावों की आहट ने गांवों में फिर माहौल गर्मा दिया है। चौपाल, चौराहे पर सिर्फ पंचायती चुनाव की चर्चा है। लेकिन कस्बा बराड़ा में नगर परिषद बनाए जाने की घोषणा के कारण कई गांवों की सरपंची दांव पर लगने की सम्भावना है। इससे कुछ लोग काफी बेचैन हैं।
प्रदेश में सता परिवर्तन के कारण पंचायती चुनाव को लेकर कुछ खिले-खिले चेहरे मुरझाए एवं दशकों से कुछ मुरझाए चेहरे खिले-खिले नजर आ रहे हैं लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता दम-खम से पंचायती चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। विदित रहे कि आगामी वर्ष में मौजूदा पंचायत का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसी बात को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग हरियाणा द्वारा अप्रैल में चुनाव कराने की संभावना व्यक्त कर दी है। इससे क्षेत्र में चुनावी हलचल तेज हो गई है। जिन गांवों में सरपंच का पद रिजर्व नहीं है, उन गांवों में तो चाय, कॉकटेल पार्टियों का दौर भी शुरू हो गया है। ध्यान रहे कि पहले यह धारणा बनी हुई थी कि ग्रामीण लोकसभा चुनावों को गम्भीरता से नहीं लेते थे लेकिन मीडिया में असरदार अभियान चलने के कारण खासकर प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के अंदाज ने ग्रामीणों को मतदान करने के लिए प्रेरित किया है।
रिकार्ड मतदान इसका परिणाम ही कहा जा सकता है। ऐसे ही विधानसभा चुनावों में भी रिकार्ड मतदान हुआ है। उक्त दोनों चुनावों को लेकर ग्रामीण चाहे इतने ज्यादा गंभीर न हो, मगर पंचायती चुनाव तो ग्रामीणों की नाक का सवाल होते है इसलिए चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों ने गोटियां फिट करनी शुरू कर दी हैं एवं गांवों में सरपंच बनने के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गया है। वैसे कुछ सरपंचों ने देश में चल रही मोदी लहर को देखते हुए विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा का दामन थामकर फिर से गांव का सरपंच बनने का सपना संजोए रखा है। नि:संदेह पंचायती चुनाव को कोई भी पार्टी अपनी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं बनाती लेकिन क्षेत्र मुलाना के हर पार्टी के बड़े नेता पंचायती चुनाव दमखम से लड़ने का दावा कर रहे हैं। वैसे सत्ता पक्ष पर यह दबाव अवश्य होता है कि उसकी पार्टी से संबंधित ज्यादा सरपंच चुने जाएं। पता चला है कि इसके लिए भाजपा द्वारा समर्पित कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता लोचन शर्मा, अाशीष गर्ग, नरेश बख्शी का कहना है कि देश-प्रदेश में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनी है इसलिए अधिकतर गांवों में भाजपा से संबंधित लोग ही सरपंच चुने जाएंगे क्योंकि मोदी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है।
एक तरफ तो गांवों में कुछ लोग सरपंच का चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं बराड़ा एवं साथ लगते गांवों में भ्रम की स्थिति बरकरार है क्योंकि बराड़ा में शीघ्र ही नगर परिषद बनाई जाएगी। ऐसी घोषणा स्थानीय विधायक संतोष सारवान ने कुछ दिन पहले की है। यदि बराड़ा में नगर परिषद बना दी जाती है तो निर्धारित जनसंख्या पूरी करने के लिए साथ लगते कुछ गांवों को बराड़ा के साथ जोड़ा जाना तय है। इस स्थिति में लगभग आधा दर्जन गांवों में सरपंच का चुनाव नहीं हो पाएगा। मौजगढ़ के एक व्यक्ति का कहना है कि सरपंच का चुनाव लड़ना मेरा सपना है लेकिन जिस प्रकार की खबरें आ रही हैं, उससे लगता है कि वह सरपंच का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे लेकिन उन्हें खुशी होगी कि बराड़ा को नगर परिषद का दर्जा दिया जा रहा है। कांग्रेस के युवा नेता वरुण चौधरी का कहना है पंचायत चुनाव में वह हर स्तर पर पूरी तैयारी से पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव में उतारेंगे।
चुनाव में हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन होगा
भाजपा प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य सतीश मेहता का कहना है कि ग्राम पंचायत, जिला परिषद, ब्लाक समिति चुनाव में भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर जीतने वाले व्यक्तियों को ही खड़ा करेगी। इनेलो के पूर्व विधायक राजबीर सिंह बराड़ा पंचायती चुनाव को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि इनेलो पंचायती चुनाव में हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर यह सिद्ध कर देगी कि मुलाना इनेलो का गढ़ है। पंचायत चुनाव का परिणाम किसी भी पार्टी के पक्ष में जाए, यह तो आने वाला समय ही बताएगा मगर यह तय है कि क्षेत्र मुलाना में पंचायती चुनाव में कोई भी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी।