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हिंदी बोलने पर जब देश में ही शर्म करेंगे तो कैसे होंगे गौरवांवित

7 वर्ष पहले
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हिदंी प्रेमियों ने दैनिक भास्कर के साथ सांझा किया हिंदी का दुख दर्द

रहमदीन| बराड़ा

हिंदीभाषाके साथ अपने ही देश में हो रहे अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का समय चुका है। अगर हम अपने ही देश में अपनी राष्ट्रभाषा को बोलने में शर्म महसूस करते हैं और अंग्रेजी भाषा को बोलते हुए गर्व से कहते हैं कि हम भारतीय हैं तो हमें भारतवर्ष के वासी होने पर इतराना नहीं चाहिए।। आज हिंदी के साथ उसके अपने ही घर में परायों जैसा सलूक किया जाता है। यहां तक कि हिंदी को अनपढ़, गवारों की भाषा कहकर बेइज्जत किया जाता है। अक्सर बैंकों में कामकाज की भाषा हिंदी को अपनाने पर बल जरूर दिया जाता है लेकिन इस बात को अमल में कम ही लाया जाता है। हिंदी भाषा के साथ हो रहे अन्याय के बारे में कई मंचों के माध्यमों से हिंदी प्रेमी हिंदी को अपनाने की जोरदार वकालत भी कर चुके हैं लेकिन सच्चाई यही है कि हिंदी भाषा को आजादी से लेकर आज तक भी वह दर्जा नहीं मिल पाया, जिसकी वह सच में हकदार थी।

हाल ही बीते हिंदी दिवस पर विभिन्न शिक्षाविदों हिंदी प्रेमियों ने हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार रखे। दैनिक भास्कर के साथ अपने विचार सांझा करते हुए इन शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने हिंदी के बारे में कुछ यूं बताया।

हिंदी भाषा को जहां बोलते, पढ़ते, सुनते हुए मन में जिस प्रकार का आंनद मिलता है वह अपने आप में अद् भुत होता है, जबकि दूसरी किसी भी भाषा में वह सब नहीं मिल सकता। हिंदी को बोलने, सुनने, लिखने में हमें शर्म का नहीं बल्कि गर्व का अहसास करना चाहिए। जब भी मौका मिले हमें इसकार खूब प्रचार करना चाहिए।

प्रीतिछाबड़ा, एचओडीकंप्यूटर विभाग

हिंदी है, हम वतन है हिंदुस्तान हमारा... ये लाइनें बेशक हमें हिंदुस्तानी होने पर गर्व करने को कहती हों लेकिन हमारी हिंदी जोकि हिदुस्तान की राष्ट्रभाषा है, आज अपना महत्व खोती जा रही है। आजकल यह देख कर मन बड़ा दुखी होता है कि आजकल बच्चे हिंदी साहित्य को पढ़ने में कोई रूचि नहीं रखते जबकि यह साहित्य हमारी अमिट पहचान है।

डॉ.पुष्पा, कॉलेजलेक्चरर

आजकल के तकनीकी युग में भी हिंदी का अपना एक विशेष ही महत्व है। फेसबुक, व्हट्सएप पर हिंदी में लिखे हुए लेखों को आजकल अंग्रेजी में लिखे शब्दों की बजाय ज्यादा पसंद किया जाता है। इससे हम जाने अनजाने में हिंदी का प्रचार और प्रसार कर रहे हैं जोकि हिंदी के भवि