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जहां पत्थर भारी हो जाए, वहीं मेरा मंदिर स्थापित करना

7 वर्ष पहले
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33करोड़देवी-देवताओं के भारत देश में अनेक धार्मिक स्थल लोगों के अास्था का केन्द्र है। ऐसा ही उपमंडल के गांव अधोई में स्थित मां शारदा देवी का मंदिर के प्रति लोगों की भारी अास्था है। श्रद्धालुओं का कहना है यहां मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। रविवार को इस मंदिर में दर्शन के लिए काफी श्रद्धालु आते हैं। विदित रहे कि गांव में स्थित मां शारदा मंदिर भारत पाक विभाजन से पहले पाकिस्तान के एक हिस्से रावलपिंडी के गांव नड़नावली में स्थित था। 1947 में विभाजन के समय लोग जान बचाते हुए राहत शिविर में गए। गांव अधोई के बुजुर्ग पंडित मोहन लाल ने बताया कि विभाजन के समय जब लोग जान बचाते हुए राहत शिविर में आए तो मां शारदा ने पंडित तुलसी दास को सपने में बताया कि तुम हमें छोड़ कर क्यों जा रहे हो मैं तुम्हारी कुलदेवी हूं, मुझे भी अपने साथ ले चलो। मन्दिर में रखे पत्थर को उठा लो जहां यह पत्थर भारी हो जाए वहीं मेरा मन्दिर स्थापित कर देना। तुलसी दास के बेटे बरकत राम ने बताया कि उनके पिता जी राहत शिविर से छिपते-छिपाते उस मन्दिर से मां का पत्थर उठा लाए। राहत शिविर से वह गांव अधोई पहुंचे तो जैसे ही मौजूदा स्थान पर पत्थर रखा गया तो पत्थर भारी हो गया और कोशिश करने पर भी किसी से जब वह अदभुत पत्थर उठाया गया तो इसी स्थान पर मन्दिर स्थापित कर दिया। गांव के वासुदेव, रोशन लाल, गंगा राम ने बताया कि गांव में पाकिस्तान से उजड़ कर पंडितों के 100 घर आए थे। हम लोग पंडताई नहीं करते हैं। यहां के ज्यादातर लोग सेना में सेवारत हैं। हम शारदा माता के पुजारी हैं। मंदिर की देखभाल करने वाले सेवानिवृत्त सूबेदार बृजभूूषण के अनुसार इस मंदिर में मन्नतें मांगने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं। मंदिर में हर वर्ष मां का जगराता कराया जाता है। खासकर पंजाबी ब्राह्मण बिरादरी से संबंधित नवविवाहित जोड़ा मां का आशीर्वाद लेने जरूर आता है। कौशल्या देवी, वीरा देवी, गुड्डी देवी, निशा रानी, शकुंतला देवी का कहना है कि मां शारदा ने हमें बड़ा सहारा दिया है। राजू का कहना है कि मां शारदा ने मेरे लिए जो चमत्कार किया है।