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बीमा योजना को बंद किए जाने की उठी मांंग

5 वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को तुरंत प्रभाव से बंद किए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र के किसानों ने बुधवार को अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले एसडीएम कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई सभा के जिलाध्यक्ष मोलड़ सिंह आर्य ने की।

किसानों ने इस दौरान कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के स्थान पर किसानों के हितों वाली योजना लागू की जाए। जब तक किसान हित की योजना लागू नहीं हो जाती तब तक मुआवजा देने की योजना को पहले की तरह ही चालू रखा जाए। किसानों ने इस संबंध में एसडीएम पृथ्वी सिंह को एक ज्ञापन भी सौंपा। किसान नेता मोलड़ सिंह ने कहा कि किसानों के सभी प्रकार के कर्जे माफ किए जाएं। सरकार किसानों के लिए ऐसी नीति बनाए कि किसानों को कर्ज लेना ही ना पड़े। स्वामी नाथन कृषि आयोग की सिफारिशों के अनुसार कृषि उत्पाद पर हुई लागत से किसानों को 50 प्रतिशत अधिक मूल्य दिया जाए। साल 2013-14 2014-15 और 2016 में सरकार द्वारा जारी किया गया खराब फसलों का मुआवजा कुछ किसानों को अभी तक भी नहीं मिला है। उन किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि दी जाए।

आर्य ने कहा कि आवारा पशुओं के कारण किसानों की फसलों को नुकसान हो रहा है। आवारा पशुओं पर रोकथाम लगाने के लिए सरकार प्रदेश में पशु मेलों को फिर से शुरु करवाए। किसान के खेतों में बिजली पानी की उचित व्यवस्था करवाई जाए। किसान सभा के सदस्यों ने कहा कि किसानों की सभी मांगों को सरकार तुरंत प्रभाव से पूरा करे। यदि सरकार समय रहते किसानों की लंबित मांगों को पूरा नहीं करती है तो किसान सभा सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने से भी गुरेज नहीं करेगी। प्रदर्शन में किसान सभा के तहसील प्रधान चंदगी राम सिहाग, सचिव रिछपाल कड़वासरा, उपप्रधान सुशील आनंद, ईश्वर ग्रेवाल, सरदार बलजीत सिंह, श्रवण कुमार, पुष्पेंद्र रहेजा, भूप सिंह, धर्मबीर बजाज, महावीर सिंह, भीमसेन कथूरिया, मनोज चुघ, रोशन दास, वीरेंद्र आदि उपस्थित रहे।

मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन करते किसान।

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