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नजर में पाप होता है, नजर में धर्म होता है...
भारतीयसाहित्य अकादमी से जुड़े चेतना काव्य मंच उकलाना के तत्वावधान में स्थानीय स्वामी विवेकानंद हाई स्कूल में बरवाला के सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल प्रकरण धर्म की आड़ में अधर्म फैलाने वाले संतों का चोला ओढ़ने वाले पाखंडी और ढोंगी संतों को लेकर एक मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय स्टेट बैंक शाखा उकलाना के एसए विजय जैन ने शिरकत की और कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक भगवान दास चावला ने की। इस दौरान मुख्य अतिथि विजय जैन ने कहा कि एक कवि अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से वर्तमान के साथ भविष्य का भी चित्र प्रस्तुत करते है। उन्होंने कहा कि हमें धर्म के मर्म को जानना बहुत जरूरी है और हमेशा ऐसे ही काम करने चाहिए, जिससे आपसी प्रेम बढ़े कि अपयश फैलाए। काव्य गोष्ठी में मंच के अध्यक्ष सत्यभूषण बिंदल ने अपनी काव्य रचना अपने बनाए बंदे के कुछ काम, राम तू देख जरा, करे तुझे बदनाम, राम तू देख जरा, देख जरा आके अपने आश्रम और डेरे सारे, बम-गोलियां और कमांडो के यहां देख नजारे, भगवान दास चावला ने नजर में पाप होता है, नजर में धर्म होता है,नजर में स्वर्ग होता है और नजर में ही नरक होता है, मंच के सचिव देवीलाल धामू की विशेष प्रस्तुति बाबा रामपाल तूने ऐसी कला दिखाई क्यों, दूसरों की स्वर्ग की टिकट काटी,पर खुद की नरक की कटाई क्यों, रवि सरोहा ने दर्द दिल में ही नहीं घंटों का डेली जाप है, धर्म का लेबल लगा है,जिसे खोलिए तो पाप है और जयप्रकाश की प्रस्तुति हर तरफ अब माइको का शोर है, धर्म के प्रचारकों का जोर है तथा बलराज कुंडू जगदीश पेटवाड़िया द्वारा बहुत काव्य रचना धर्म को लेकर प्रस्तुत की गई जो सभी लोगों के लिए भविष्य में अपनाने के लिए एक अहम संदेश है। इस प्रकार चेतना काव्य मंच द्वारा धर्म के सही मार्ग को छोड़कर झूठे मार्ग की ओर जाने वाले लोगों को संदेश दिया गया।
काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि विजय जैन को सम्मानित करते सत्यभूषण बिंदल।