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सर्वे कहता है... 30 गांव ऐसे, जहां 800 से 600 तक गिरा लिंगानुपात

5 वर्ष पहले
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ततारपुर खालसा | स्थिति चिंताजनक, प्रेरित करने को सरपंच देते हैं 500 इनाम

पिछलेसाल की तुलना में वर्ष 2016 में लिंगानुपात के मामले में जिले की स्थिति बेशक कुछ सुधरी है, लेकिन विभाग की सर्वे रिपोर्ट कहती है कि कुछ गांवों में आज भी बेटियों को बोझ समझा जाता है। दरअसल इन गांवों का लिंगानुपात 800 से नीचे, यहां तक की 600 तक भी गिर गया। इस कारण अब यहां को-ऑर्डिनेटर लगाकर हालात सुधारने की तैयारी है।

हाल ही में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से गांवों में सर्वे कराया गया था। गांवों की यह स्थिति इसी रिपोर्ट में सामने आई है। बेहद चिंताजनक लिंगानुपात वाले गांवों की सूची में करीब 30 गांव शामिल हैं। हालांकि महीनेभर में कुछ गांवों के लिंगानुपात में कुछ सुधार भी हुआ, मगर स्थिति को संतोषजनक करने के लिए महिला विलेज को-ऑर्डिनेटर नियुक्त की जाएंगी। प्रथम चरण में 10 गांवों में नियुक्तियां होनी हैं। इन 10 गांवों में से दो कालाका ततारपुर खालसा में पंचायत के अलग प्रयास सामने आए हैं।

लोगों को समझाने के बाद सुधार नहीं होने पर होगी सख्ती: पीओ

^सर्वेमें जिन गांवों में लिंगानुपात कम पाया गया, वहां पर महिला ग्राम समन्वयकों की नियुक्ति की जा रही है। ताकि समाज में बेटियों को लेकर जागरूकता लाई जा सके। उन्होंने कहा कि सरकारी आदेशों के अनुसार लोगों को पहले समझाया जाएगा। उसके बाद सुधार नहीं होने की स्थिति में सख्ती से भी काम लिया जाएगा। -लता शर्मा, पीओ, महिला एवं बाल विकास, रेवाड़ी।

5 जगह समन्वयक लगाए, इतने ही अगले 10 दिन में

महिलाएवं बाल विभाग की ओर से 5 जगहों पर समन्वयकों की नियुक्ति कर दी गई है, जबकि अगले करीब 10 दिन के अंदर इतने ही समन्वयक और लगा दिए जाएंगे। रेवाड़ी खंड के गांव कालाका में मुकेश पूनम, जाटूसाना के गांव मस्तापुर में मंजू बाई पुष्पा यादव, खोल के बुड़ौली में ईशा रानी रेनू, बावल के बोलनी में गीता सुषमा, टांकड़ी में कविता सुनीता को विलेज कॉर्डिनेटर नियुक्त किया है। वहीं ततारपुर खालसा, मूंदी, कंवाली, अहमदपुर लूखी में 2-2 महिला ग्राम समन्वयक के लिए 8 फरवरी को एडीसी अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेंगे।

पंचायत की कोशिश : बेटियोंको सम्मान दिलाने के लिए सरपंच राकेश कुमार ने खुद प्रेरक पहल की है। बेटी के जन्म पर घर में पौधारोपण करवाया जाता है, साथ ही सरपंच खुद 500 रुपए नकद इनाम भी बेटी के सम्मान में देते हैं। सरपंच ने कहा कि पंचायत अपने स्तर पर गांव में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए सिलाई सेंटर खुलवाने महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करेगी। ताकि इससे बेटियों को बोझ मानने की धारणा बदल सके।

पंचायत की कोशिश : सरपंचमुनेश आंगनवाड़ी वर्कर मंतोष देवी ने बताया कि बेटी बचाओ की जागरूकता के लिए गांव में हर शनिवार को नारी चौपाल लगाई जाती है। इसमें गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड से लिंग की पहचान कराने, कन्या भ्रूण हत्या कराने पर पकड़े जाने पुलिस कार्रवाई करने के बारे में बताया जाता है। ताकि ज्यादा से ज्यादा जागरूकता लाई जा सके लिंगानुपात को बढ़ोतरी हो सके।

गांव ततारपुर खालसा में भी लिंगानुपात की स्थिति चिंताजनक रही है। जागरूकता के प्रयासों का दावा पंचायतें करती रही हैं, मगर धरातल पर नतीजे सकारात्मक नहीं मिल पाए हैं। सर्वे के दौरान सामने आया कि यहां भी लोगों में पूरी जागरूकता नहीं है तथा 800 से कम लिंगानुपात रहा। इस कारण यहां पर भी जागरूकता की जरूरत मानी गई है। इस कारण गांव में महिला ग्राम समन्वयक नियुक्त की जा रही हैं।

गांव कालाका में भी लड़कों के मुकाबले में लड़कियों की संख्या में काफी कमी आई है। यही वजह है कि रेवाड़ी खंड में सबसे पहले इसी गांव में दो ग्राम समन्वयकों को नियुक्त किया गया। वर्ष 2015 के मुकाबले साल 2016 के लिंगानुपात में कमी दर्ज हुई है। 2015 में जहां लड़कियों की संख्या 22 थी, जबकि केवल 4 ही लड़कों का जन्म हुआ था। इस बार जागरूकता के प्रयासों के बावजूद लिंगानुपात 600 करीब रहा।

ये होंगे समन्वयकों के काम

येसमन्वयकगांव में गर्भवती महिलाओं बच्चों का रिकार्ड रखेंगी। जब गर्भवती महिलाओं का डाटा रिकार्ड में है तो इन समन्वयकों का उनके संपर्क रहेगा। समय-समय पर गर्भवती महिलाओं से बातचीत भी की जाएगी।

भ्रूणहत्याको लेकर निगरानी बेहतर हो सकेगी। पूरी तरह नजर रहेगी कि किसी ने गर्भपात तो नहीं कराया। ऐसा होने की सूरत में पूछताछ से लेकर अन्य कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

येको-ऑर्डिनेटरग्रामीण महिलाओं को जागरूक करेंगी। महिलाओं सभा का आयोजन कर उन्हें सरकारी योजनाओं के बारे में भी बताएंगी तथा जागरूकता लाएंगी।

पीएनडीटीएक्टकी भी जानकारी दी जाएगी। ताकि कन्या भ्रूण हत्या को पूरी तरह रोका जा सके।

पहले चरण में 5 गांवों में नियुक्त की महिला विलेज काे-ऑर्डिनेटर, 5 में और की जाएंगी, कुछ पंचायतें अपने स्तर पर कर रही अलग पहल, मगर अभी करने होंगे प्रयास

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