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सिवाना का जलघर सूखा, महिलाएं ढोती हैं पानी
बेरीउपमंडल के गांव माजरा में पीने के पानी की किल्लत बनी हुई है। गांव का जलघर सूखा हुआ है और महिलाओं को सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ता है।
ग्रामीण अपनी समस्या को लेकर हर अधिकारी के पास जा चुके हैं, लेकिन समस्या ज्यों कि त्यों बनी है। पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कारण उनके गांव में पानी की समस्या बनी हुई है गांव में लाखों रुपए की लागत से जो जलघर बनाया गया है उसमें भी काेई कर्मचारी नहीं आता है। गांव में पानी की सप्लाई 15 से 20 दिन में छोड़ी जाती है। एडवोकेट कर्मजीत कादियान का कहना था कि इस समस्या को लेकर विभाग के एक्सईएन से मिले तो उन्होंने विभाग के जेई को निरीक्षण करने के लिए भेजा था। जेई ने ग्रामीणों को बताया कि जलघर का पानी मोटर से सप्लाई के लायक नहीं हैैैै।
यहकहना है ग्रामीणों का
ग्रामीणप्रवीन, पवित्र सिंह, बलबीर सिंह, श्रीभगवान, बिजेन्द्र, मामन, सुधीर कुमार, इंद्रावती, मनजीत का कहना था कि गांव के जलघर में कोई कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आता है। गांव के जलघर में आवारा जानवर घूमते रहते है। इस समस्या को लेकर सीएम से लेकर विभाग के हर अधिकारी से मिल चुके हैं। सरकार नए-नए जलघर बना रही है। पुराने जलघरों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा हैैैै। ग्रामीणों ने दुख जताया कि पूरी गर्मी पानी मोल लेकर पिया जाता हैैैै। कपड़े धोने जानवरों के लिए टैंकर खरीदते हैैं। ग्रामीणों ने जलघर के बारे मे आरटीआई के तहत जानकारी भी मांगी है। ग्रामीणों का कहना है गांव के जलघर के टैंकों की सफाई करवाए सालों बीत चुके हैं।
बेरी. पानीकी बूंद-बूंद को तरसती सिवाना गांव की महिलाएं।