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अस्पताल का गेट 15 दिन से बंद, मरीज परेशान
5 फरवरी से नहीं हो पा रहे थे आॅपरेशन
सिविल अस्पताल का गेट जो 15 िदन से बंद है।
झज्जर. सििवलअस्पताल में एचआईवी िकट अाने के बाद मरीजों का टैस्ट करते डॉक्टर।
बेरी | बेरीके सामान्य अस्पताल का मेन गेट पिछले 15 दिन से बंद है। इसके कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों को दिक्कत का सामना करना पड़ा रहा है। वहीं, अस्पताल स्टाफ का माने तो बेरी अस्पताल में साथ लगती बस्ती के सुअर अंदर दाखिल हो जाते थे। लिहाजा ये बंद कर दिया गया है।
बताया गया कि गेट पर स्लैब बनाने का काम करवाना था। इसका ठेका 35 हजार में छोड़ा गया था, लेकिन ठेकेदार मेन गेट का स्लैब उखाड़कर बिना बनाए ही चला गया। इसके कारण मेन गेट बंद पड़ा है। ऐसे में मेन गेट के साथ लगते छोटे गेट से लोगों को आना जाना पड़ रहा।
मेन गेट बंद होने के कारण प्राईवेट वाहन में अपना इलाज करवाने वाले मरीजों को दिक्कत हो रही है। सामान्य अस्पताल का मेन गेट बंद होने के कारण वाहन अंदर दाखिल नहीं हो सकते है। इसलिए मरीजों को पैदल ही छोटे गेट से जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों की माने तो कई बार इमरजेंसी के समय वाहन वालों को बसस्टैंड के सामने वाले गेट से अंदर दाखिल होना पड़ता है। कई दफा तो अनजान लोग अपने का हारन ही बजाते रहते।
इंचार्जने माना पंद्रह दिन से गेट बंद
अस्पतालके इंचार्ज डॉक्टर शेर सिंह का कहना है कि ठेकेदार किसी कारण से नहीं सका। ऐसे में 15 दिन से मेन गेट बंद पड़ा है। अब जल्द ही दूसरे ठेकेदार से इस स्लैब को बनवा दिया जाएगा।
भास्कर न्यूज | झज्जर
आखिरकारसिविल अस्पताल में एचआईवी जांच के लिए किट गई है। इसका पर्याप्त स्टाक आने पर मरीजों के अलावा स्टाफ ने भी राहत महसूस की है। अन्यथा पिछले पांच दिन से एचआईवी जांच केंद्र से मरीज लौट रहे थे।
बता दें कि सिविल अस्पताल में सामान्य स्वास्थ्य व्यक्ति के अलावा गर्भवती और सर्जरी केस के मरीजों की एचआईवी जांच होती है। इस रूटीन प्रक्रिया के लिए पंचकूला से इसकी किट आती है। हालांकि बीते तीन माह से ये किट नहीं रही थी। ऐसे में प्रदेश के हर जिला मुख्यालय में एचआईवी किट होने से मरीज परेशान हैं। सारी सप्लाई होने पर अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर ही इन्हें परचेज कर रहा है। अब जब से सरकारी सप्लाई नहीं रही तब से आलम ये है कि पर्याप्त स्टाक नहीं रहता।
इमरजेंसी केस को छोड़कर सामान्य तौर पर जांच के लिए आने वाले मरीज वापस लौटते हैं। उन्हें मजबूरी में 300 से 400 रुपए देकर ये जांच प्राइवेट लैब में कराना पड़ती है। पांच फरवरी से तो सामान्य के अलावा इमरजेंसी केस को भी किट नहीं मिल पा रही थी। इस समस्या को देखते हुए अब अस्पताल प्रबंधन ने लोकल स्तर पर किट परचेज कर ली हैं। इसके बाद एचआईवी ब्रांच में इसकी जांच का काम भी शुरू हुआ।
लोकलस्तर पर खरीदते हैं जरूरी मेडिसन
^मरीजोंको कोई परेशानी आए। लिहाजा हम एचआईवी समेत अन्य जरूरी मेडिसिन की लोकल स्तर पर खरीद करते हैं। एचआईवी किट भी इसी क्रम में खरीदी गई है। इसे इमरजेंसी के अलावा सामान्य जांच के लिए आने वाले लोग परेशान नहीं होंगे। डॉ.रमेश धनखड़, सीएमओ झज्जर।