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ये कैसी अवैध खनन रोकने की व्यवस्था अब तो दिन में भी चल रही है जेसीबी

6 वर्ष पहले
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हथनीकुंडबैराजको अवैध खनन से खतरा है। भू-गर्भ विभाग एसडीएम बिलासपुर पूजा चांवरिया भी इस पर चिंता जता चुकी है। इसके बाद भी अवैध खनन पर लगाम लगाने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। नियमों को ताक पर रख दिन दिहाड़े अवैध खनन जारी है।

मंगलवार को दिन भर खनन माफिया द्वारा चार अर्थमूवर मशीनों द्वारा खुदाई कर रेत बजरी निकालता रहा। दैनिक भास्कर ने मंगलवार को करीब तीन बजे जेसीबी से हो रहे अवैध खनन का फोटो लिया। इस दौरान दूर-दूर तक अवैध खनन रोकने के लिए बनाई गई टीम के अधिकारी कर्मचारी दिखाई नहीं दिए। ही बैराज की सुरक्षा के लिए सिंचाई विभाग के कर्मचारी मिले।

बेखौफहै खनन माफिया : प्रदेशमें 2009 से खनन पर पाबंदी है। अभी तक खनन माफिया रात के समय हरकत में आता था, लेकिन जब से सरकार बदली है। तब से अवैध खनन माफिया के हौसले ज्यादा बुलंद हो गए है। खनन माफिया बेखौफ होकर दिन के समय ही अवैध खनन करने से नहीं घबरा रहा। इससे सरकार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह उठ रहे हैं। अधिकारी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करते हैं।

रोकहटने पर भी यहां नहीं हो सकती खनन : खननपर कोर्ट की पाबंदी हटने के बाद भी बैराज की अप स्ट्रीम डाउन स्ट्रीम के पांच किमी एरिया में खनन नहीं हो सकती। उसके बाद भी सभी नियमों को तोड़ा जा रहा है। अवैध खनन कोर्ट की अवमानना के साथ-साथ बैराज टूटने के लिए खतरा बढ़ा रही है। अधिकारियों की नाक के नीचे सरेआम अर्थमूवर मशीनें नदी का सीना चीर कर खनन सामग्री निकाल रही है। दिल्ली की यमुना जियो संस्थान के पदाधिकारी भीम सिंह रावत यमुना बचाओ समिति के प्रधान किरणपाल राणा का कहना है कि अवैध खनन से यदि हथनी कुंड बैराज टूटता है तो प्रशासनिक अधिकारियों पर लापरवाही राष्ट्र संपत्ति का केस दर्ज होना चाहिए। अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण ही अवैध खनन माफिया के हौसले बुलंद है।

चारअर्थमूवर मशीनें लगी हैं : हथनीकुंडबैराज के ठीक सामने चार अर्थमूवर मशीनें दिन रात खुदाई में लगी है। 15 ट्रैक्टर ट्राली माल की ढुलाई कर रहे है। डंपर ट्रक भी रेत की ढुलाई में लगे हैं।

ये खतरा है बैराज को

अवैधखनन से हथनीकुंड बैराज आस पास भूमि कटाव तेजी से हो रहा है। ताजेवाला हेड अवैध खनन से हुए भूमि कटाव के कारण ढह चुका है। यमुना नदी के पानी को रोकने के लिए बैराज बना है। उसके बाद दिल्ली, यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड राजस्थान में यहां से पानी छोड़ा जाता है। बैराज टूटने से हरियाणा यूपी में बाढ़ और अन्य राज्यों में पानी की सप्लाई बंद हो जाएगी, लेकिन इस तरफ किसी भी अधिकारी राजनेता का ध्यान नहीं है। बैराज को 300 करोड़ रुपए में बनाया गया था।

इनकाएक ही जवाब

खननअधिकारी नीरज कुमार का कहना है कि अवैध खनन यूपी सीमा में हो रही है। ध्यान रहे यूपी में चंद साइट खनन के लिए खुली है। वहीं सिंचाई विभाग के एसडीओ चांदी राम का कहना है कि अवैध खनन बैराज की सुरक्षा के लिए अधिकारियों को लेटर लिखा है। पता नहीं अधिकारी लेटर मामला दूसरे ऊपर डालना छोड़कर कार्रवाई करेंगे।

खिज़राबाद. अवैधखनन में लगी जेसीबी।