रथयात्रा के बहाने प्रदेश में बिखेरगी सरस्वती की गाथा
निर्धारित समय से ढाई घंटे लेट पहुंचे मंत्री
भास्करन्यूज| यमुनानगर/बिलासपुर
सरस्वतीनदीको धरती पर पुनर्जीवित करने के प्रयास के बाद सरकार ने उसे लोगों के दिलों में पुनर्जीवित करने के लिए सरस्वती रथयात्रा शुरू की है। रथयात्रा के बहाने सरस्वती की गाथा प्रदेश में बिखेरी जाएगी। तीन दिवसीय सरस्वती महोत्सव की शुरुआत ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित सरस्वती उद्गम स्थल से शुरू हुई। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा रथयात्रा को हरी झंडी दिखाने पहुंचे। यहां पर उन्होंने पूजा अर्चना कर परिवार और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। लेकिन इस दौरान अधिकारी सरकार को दबी जुबान में कोसते रहे। क्योंकि मंत्री को सुबह 11 बजे पहुंचना था लेकिन वे डेढ़ बजे पहुंचे। तीखी धूप में अधिकारी सिकते रहे (दिन का तापमान 24 डिग्री था) और कह रहे थे कि यहां पूरा दिन खराब कर दिया और शाम को कोठी (उनके सरकारी आवास) पर फाइलें पहुंच जाएंगी। जिन पर देर रात तक साइन करने होंगे। मंत्री ने शाम के समय सरस्वती नगर मुस्तफाबाद में सरस्वती की आरती की।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस लुप्त हुई सरस्वती को लोग अपने घर बैठे देख सकेंगे। शीघ्र ही सरस्वती नदी धरा पर बहेगी। जहां घर-घर में गीता के श्लोक गूंजते हो, वहां किसी को भी गोमांस खाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। रामबिलास शर्मा ने सरस्वती पर लगी प्रदर्शनी का रिबन काटकर शुभारंभ किया। उन्होंने आदि बद्री से सरस्वती रथ यात्रा को हरी झंडी देकर रवाना किया। अध्यक्षता स्पीकर कंवरपाल ने की थी।
आदि बद्री में वन विभाग अन्य विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। इसे देखने के लिए दूर-दूर से तो क्या लोगों का आना था, आसपास के लोग भी नहीं आए। खुद की लगाई प्रदर्शनी को अधिकारियों ने ही देखा। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज ने कहा कि आने वाले दिनों में सरस्वती की खुदाई का काम तेजी से होगा। कार्यक्रम में विधायक बलवंत सिंह, पूर्व सांसद अमन कुमार नागरा, सहित अन्य भाजपा नेता पहुंचे हुए थे।
इस मौके पर डीसी डॉक्टर एसएस फुलिया, एसपी अरूण नेहरा, एसडीएम प्रेमचंद, डीआईओ रमेश गुप्ता, डीडीपीओ गगनदीप सिंह, भूपाल खदरी, डीएसपी बिलासपुर सुभाष चंद, अजय राणा, बीडीपीओ बिलासपुर नरेंद्र सिंह, मनरेगा अधिकारी दिलावर सिंह, बलकार प्रीतम सिंह नवनियुक्त पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बिलासपुर| प्रदर्शनीका अवलोकन करते शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, विस स्पीकर कंवरपाल गुर्जर अन्य।
भवन के निर्माण के लिए 5 लाख की घोषणा
हरियाणाके शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा विधानसभा अध्यक्ष कंवर पाल ने श्री आदि बद्री गुरुकुल वेद संस्कार पाठशाला के भवन के निर्माण के लिए 5 लाख रुपए के अनुदान देने की घोषणा की। पुजारी विनय स्वरूप ने बताया कि मंत्री ने गुरुकुल वेद संस्कार पाठशाला को गोद लेने की घोषणा भी की है। इस समय पाठशाला में 26 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
गलतनेताओं को करनी पड़ती है जेल की यात्रा
पूर्वसीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के फीता काटू सरकार के बयान पर शर्मा ने कहा कि हुड्डा पर केस दर्ज हुआ है इसलिए वे इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि गलत काम करने वाले नेताओं को रेल जेल की यात्रा करनी ही पड़ती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज में भेदभाव की राजनीति हुई है। भाजपा सरकार प्रदेश में विकास कराना चाह रही है तो विपक्ष को यह बात सहन नहीं हो रही।
सरस्वती नदी कुंड बनवाने आए थे
हरीमाऊने बताया कि वे सरस्वती नदी उद्गम स्थल पर पहले भी चुके हैं। सरस्वती नदी कुंड जब बनाया जा रहा था तब वे यहां पर आए थे। उन्होंने खुद काम किया था। इन दिनों कुंड की सफाई चल रही है इसलिए यहां पर पानी नहीं है। उनका कहना है कि सभी रिसर्च साबित करते हैं कि सरस्वती नदी जमीन के नीचे बह रही है। यमुनानगर में ही पूरे देश में कईं वैज्ञानिकों ने रिसर्च की। जहां पर नदी जमीन के नीचे बह रही है, वहां का पानी सरस्वती का ही है। कईं रिसर्च सेंटर में यह बात साबित हो चुकी है।
14 भाषाओं मेंलिखी सरस्वती पर किताबें
कर्नाटकके मैसूर निवासी हरीभाऊ अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के संरक्षक हैं। ये 35 साल से सरस्वती के काम में लगे हैं। इसी तरह योगाचार्य एमए नरसीमन इतिहास भारती रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर हैं। ये भी कईं दशकों से सरस्वती की खोज और उसके इतिहास के प्रचार प्रसार में लगे हैं। रेलवे बोर्ड के एडिशनल मेंबर चेन्नई निवासी एमबीए पीएचडी किए राम मनोहर 20 साल से भारतीय संस्कृति के लिए काम कर रहे हैं। सरस्वती नदी को लेकर भी वे काम कर रहे हैं। टाटा रिसर्च सेंटर बैंगलूर के वैज्ञानिक डॉक्टर केएस वाल्डिया 30 हजार किलोमीटर हिमालय पहाड़ों की यात्रा कर चुके हैं। 50 साल तक उन्होंने हिमालय जियोलॉजी पर काम किया। वहीं 30 साल से सरस्वती पर काम कर रहे हैं। पद्मभूषण सहित कईं पुरस्कारों से सरकार उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं। उनका कहना है कि सरस्वती को जीवित करना भारतीय संस्कृति को नया जीवन देने जैसा है।